शिव शक्ति प्लांट से फैलता प्रदूषण, पर्यावरण विभाग मौन

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़। बगुरसिंया क्षेत्र की हरी-भरी पृष्ठभूमि अब केवल दृश्यात्मक सौंदर्य भर नहीं रह गई है। यहां स्थित शिव शक्ति प्लांट, रायगढ़-हमीरपुर रोड पर, स्थानीय निवासियों की शांति और स्वास्थ्य दोनों पर गंभीर संकट खड़ा कर रहा है।
स्थानीय लोग बताते हैं कि पिछले कई महीनों से प्लांट से निकलने वाला काला धुआँ और रासायनिक कचरा पूरे इलाके में फैल रहा है। सुबह-शाम हवा में घुलते रसायन और जल स्रोतों में रिसते अपशिष्ट के कारण आसपास के गांवों में सांस संबंधी बीमारियां, एलर्जी, त्वचा रोग और बच्चों में दमा की घटनाएँ बढ़ गई हैं।
पूर्व की कार्रवाई और उसका नतीजा
कुछ साल पहले भी इस प्लांट पर वायु और जल प्रदूषण के मामलों में नोटिस जारी किए गए थे। लेकिन, ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण प्लांट अभी भी पुराने स्तर की लापरवाही जारी रखे हुए है। स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि धुआँ अक्सर सड़क तक पहुंच जाता है, और तालाबों का पानी बदलते मौसम में भी इस्तेमाल के योग्य नहीं रहता।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसे अनियंत्रित छोड़ दिया गया, तो स्थानीय कृषि और पेयजल स्रोतों की गुणवत्ता पर स्थायी असर पड़ेगा। इसके साथ ही लंबी अवधि में कैंसर, लीवर और किडनी जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाएगा।
भविष्य की चिंताएँ
जल स्रोत दूषित: आसपास के तालाब और कुएँ प्रदूषित पानी से भरे हैं।
जैव विविधता पर असर: पक्षियों, पेड़-पौधों और स्थानीय वनस्पतियों की संख्या में गिरावट।
मानव जीवन पर खतरा: बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं में स्वास्थ्य समस्याओं का बढ़ता ग्राफ।
स्थानीयों की आवाज़
गांव के निवासी अब अपनी आवाज़ उठा रहे हैं। उनका कहना है, “पर्यावरण विभाग नोटिस जारी कर भर रहा है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं। प्लांट की लापरवाही हर दिन हमारे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रही है।”
यह केवल एक स्थानीय प्रदूषण मामला नहीं है। यह पूरे जिले के पर्यावरणीय संतुलन और मानव स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। यदि विभाग ने तुरंत सख्त निगरानी और कार्रवाई नहीं की, तो यह मामला जन आंदोलन और मीडिया हंगामे की ओर भी बढ़ सकता है।
प्लांट के उत्सर्जन पर फिल्टर और मॉनिटरिंग सिस्टम तुरंत लागू किया जाए।
पर्यावरण और स्वास्थ्य रिपोर्टों के आधार पर नियमित निरीक्षण किया जाए।
विभागीय मौन अब नहीं चलेगा; जनता की जान और पर्यावरण की सुरक्षा दोनों ही सर्वोपरि हैं।
News associate R. Tripathi