समाज में गांवों के जमीनी स्तर की एकता ही समाज की विकास का नींव

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
विरासत की पीड़ा से आत्मसम्मान तक: केराखोल की बैठक में इतिहास, जागरूकता और एकता का संकल्प
रायगढ़। ग्राम केराखोल, विकासखंड तमनार में चौहान समाज जिला रायगढ़ के युवा प्रकोष्ठ जिला अध्यक्ष रामेश्वर चौहान के नेतृत्व में गांव के स्वजातीय बन्धुओं की बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य समाज की विरासत, संघर्ष और वर्तमान जिम्मेदारियों पर चिंतन करना था, ताकि गांव स्तर पर एकता और जागरूकता को मजबूत किया जा सके।
बैठक में समाज की उस ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख किया गया, जब दलित समाज को गहरे सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ा। बताया गया कि एक समय ऐसा भी था जब हमारे दलित समाज को केवल दोपहर में ही बाहर निकलने की अनुमति थी। गले में हांडी और पीछे झाड़ू बांधकर चलना पड़ता था, ताकि थूक या पैरों के निशान से किसी को “अपवित्र” न माना जाए। यह स्मरण करते हुए कहा गया कि हमारा समाज कितनी कठिन यातनाएं सहकर और संघर्ष करते हुए आज तक जिंदा रहा है। दोपहर के सीमित समय में भोजन की व्यवस्था करना भी एक बड़ा संघर्ष होता था।
त्रावणकोर क्षेत्र का उल्लेख करते हुए बताया गया कि वहां हमारे समाज की बहू-बेटियों के सम्मान को भी ठेस पहुंचाई गई। उन्हें कमर तक ही वस्त्र पहनने का आदेश दिया जाता था। इन ऐतिहासिक घटनाओं का जिक्र करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यह स्मरण किसी के प्रति द्वेष के लिए नहीं, बल्कि अपने समाज के संघर्ष को समझने और आत्मसम्मान को जागृत करने के लिए है।
बैठक में यह भी कहा गया कि बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर ने संविधान के माध्यम से दलित समाज को समानता, मानवाधिकार और न्याय दिलाया, जिसके कारण शासन से अधिकार और सम्मान प्राप्त हुआ। आज भी गांवों में कुछ स्थानों पर हेय भावना का दंश देखने को मिलता है, इसलिए समाज के स्वजातीय बंधुओं को जागरूक और संगठित रहने की आवश्यकता है।
संदेश दिया गया कि गांवों में एकता के साथ अपने परिवार का उत्थान करें। एकता, भाईचारा और स्नेह भावना के साथ शिक्षा को मजबूत करें, नशामुक्ति अपनाएं, सामाजिक कुरीतियों का त्याग करें, बच्चों का चरित्र निर्माण करें और युवाओं को हर संभव रोजगार से जोड़ें।
बैठक में केराखोल के सामाजिक बन्धु एवं माता-पिता तुल्य समाजसेवी अभिमन्यु चौहान, लक्ष्मी चौहान, सहस राम चौहान, चमार सिंह चौहान, अमरसिंह चौहान, नोहर साय चौहान, शंकर चौहान, घासीराम चौहान, इंजोर चौहान, गौरी चौहान, जहर साय, झाड़ू राम चौहान, दिल साय चौहान, अनिता चौहान और आसमती चौहान सहित अन्य ग्रामीणजन उपस्थित थे।
बैठक का निष्कर्ष यही रहा कि गांवों के जमीनी स्तर की एकता ही समाज के विकास की सच्ची नींव है।
News associate Keshav chauhan