आरक्षित वन में अतिक्रमण और तस्करी पर प्रहार: तमनार में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, तीन आरोपी जेल रवाना

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़। वन अपराधों पर सख्ती के संकेत देते हुए रायगढ़ वनमंडल के तमनार वन परिक्षेत्र में दो अलग-अलग मामलों में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी कर उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। आरक्षित वन क्षेत्र में अतिक्रमण की मंशा से की जा रही अवैध कटाई और अंतरराज्यीय सीमा पर कच्चे मार्ग निर्माण के जरिए लकड़ी तस्करी की कोशिश—दोनों ही मामलों में वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई कर स्पष्ट कर दिया है कि संरक्षित जंगलों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पहला मामला: आरक्षित वन में अवैध कटाई
पहला प्रकरण ग्राम मड़ियाकछार का है। यहां आरक्षित वन क्षेत्र में बहुमूल्य प्रजातियों के वृक्षों की कटाई और जमीन की सफाई कर अतिक्रमण की तैयारी की जा रही थी। ग्रामीणों की सतर्कता से सूचना वन अमले तक पहुंची। तमनार रेंज की टीम मौके पर पहुंची तो पाया कि आरोपी सुना राम समझाइश के बावजूद गतिविधि रोकने को तैयार नहीं था।
वन अधिकारियों ने विधिसम्मत कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया। न्यायालय के आदेशानुसार 12 फरवरी 2026 को आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। स्थानीय स्तर पर यह कार्रवाई एक संदेश के रूप में देखी जा रही है कि वन भूमि पर कब्जे की कोशिश अब आसान नहीं रही।

दूसरा मामला: सीमा पर तस्करी के लिए रास्ता तैयार
दूसरा मामला छिरवानी परिसर के कक्ष क्रमांक 771 का है, जो ओडिशा-छत्तीसगढ़ सीमा से सटा आरक्षित वन क्षेत्र है। यहां जेसीबी मशीन की मदद से कच्चा मार्ग तैयार किया जा रहा था। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि इस मार्ग का उपयोग अवैध लकड़ी तस्करी सहित अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के लिए किया जाना था।
सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर जेसीबी मशीन जब्त कर ली। दो आरोपियों के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 26 एवं 63, लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम 1984 की धारा 3 तथा जैव विविधता अधिनियम 2002 की धारा 7 एवं 55 के तहत वन अपराध दर्ज किया गया। दोनों आरोपियों को भी न्यायालय के आदेशानुसार न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
नेतृत्व और टीमवर्क की मिसाल
यह पूरी कार्रवाई वनमंडलाधिकारी श्री अरविंद पी.एम. के निर्देशन, उप वनमंडलाधिकारी श्री आशुतोष मांडवा के मार्गदर्शन तथा वन परिक्षेत्राधिकारी श्री विक्रांत कुमार के नेतृत्व में संपन्न हुई। प्रशिक्षु आरएफओ नरेंद्र चौधरी, परिक्षेत्र सहायक जैतराम नाग एवं विनोद तिग्गा सहित तमनार रेंज के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई।

सख्ती का संकेत
तमनार क्षेत्र खनिज संपदा और औद्योगिक गतिविधियों के कारण पहले ही संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में आरक्षित वन क्षेत्र में अतिक्रमण और तस्करी की कोशिशें पर्यावरणीय संतुलन के लिए गंभीर चुनौती हैं। वन विभाग की यह कार्रवाई न केवल कानून के पालन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि जंगलों की सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक प्रतिबद्धता का भी स्पष्ट संकेत देती है।
स्थानीय ग्रामीणों ने भी इस कार्रवाई का स्वागत किया है। अब देखना होगा कि लगातार निगरानी और कठोर प्रवर्तन से वन अपराधों पर किस हद तक अंकुश लग पाता है।