भारतमाला में ‘मुआवजे’ की मार: 43 करोड़ की कथित हेराफेरी पर दो राजस्व अधिकारी सलाखों के पीछे

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायपुर।
देश की महत्वाकांक्षी अवसंरचना परियोजनाओं में शुमार भारतमाला के नाम पर भूमि अधिग्रहण मुआवजा वितरण में कथित अनियमितताओं ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने कार्रवाई करते हुए एक डिप्टी कलेक्टर और तत्कालीन नायब तहसीलदार को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि कूटरचित दस्तावेजों और पद के दुरुपयोग के जरिए लगभग 43 करोड़ रुपये की शासकीय राशि की गड़बड़ी की गई।
गिरफ्तार अधिकारियों में शशिकांत कुर्रे (तत्कालीन तहसीलदार, अभनपुर) और लखेश्वर प्रसाद किरण (तत्कालीन नायब तहसीलदार, गोबरा नवापारा) शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार मामला दर्ज होने के बाद दोनों अधिकारी जांच से बचने की कोशिश में थे, लेकिन विशेष टीम ने तकनीकी निगरानी और स्थानीय स्तर पर लगातार दबिश के बाद 11 फरवरी को उन्हें हिरासत में ले लिया। न्यायालय में पेशी के बाद दोनों को पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है।
कैसे खुली परतें
ईओडब्ल्यू की प्राथमिक जांच में सामने आया है कि रायपुर-विशाखापट्नम मार्ग और दुर्ग बायपास के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण के दौरान मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया में गंभीर विसंगतियां थीं। आरोप है कि कुछ भू-खातों के राजस्व अभिलेखों में छेड़छाड़ कर भूमि की प्रकृति, रकबा और श्रेणी को इस प्रकार दर्शाया गया, जिससे पात्रता से कहीं अधिक मुआवजा स्वीकृत हो सके।
जांच एजेंसी का दावा है कि यह सब एक संगठित षड्यंत्र का हिस्सा था, जिसमें अधीनस्थ राजस्व अमला, कथित भूमाफिया और अन्य बिचौलिये भी शामिल रहे। मुआवजा पत्रकों की तैयारी और स्वीकृति में नियमों की अनदेखी कर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये की क्षति पहुंचाई गई।
इन धाराओं में अपराध दर्ज
आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 467 (कूटरचना), 468 (जालसाजी), 471 (कूटरचित दस्तावेज का उपयोग), 420 (धोखाधड़ी), 409 (लोकसेवक द्वारा आपराधिक न्यासभंग), 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7सी एवं 12 के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है।
कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो यह मामला राजस्व प्रशासन में जवाबदेही के लिए एक मिसाल बन सकता है।
ईडी की नजर ‘मनी ट्रेल’ पर
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी समानांतर जांच शुरू कर दी है। ईडी कथित रूप से संदिग्ध बैंक खातों, संपत्ति निवेश और वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में और नाम सामने आ सकते हैं।
व्यवस्था पर सवाल
भारतमाला परियोजना देश के सड़क नेटवर्क को नई गति देने की योजना है। ऐसे में भूमि अधिग्रहण जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में पारदर्शिता सर्वोपरि मानी जाती है। लेकिन यदि जांच एजेंसियों के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न केवल वित्तीय अनुशासन पर प्रश्नचिह्न है, बल्कि प्रशासनिक नैतिकता पर भी गहरी चोट है।
फिलहाल ईओडब्ल्यू की टीम दस्तावेजी साक्ष्य, भुगतान अभिलेख और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की बारीकी से जांच कर रही है। आने वाले दिनों में पूछताछ और दस्तावेजी विश्लेषण से इस कथित घोटाले की परतें और खुलने की संभावना है।
राज्य की नजर अब इस बात पर है कि क्या यह कार्रवाई केवल शुरुआत है, या फिर राजस्व तंत्र में जमे किसी बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश होने वाला है।