25 बाइकों की चोरी का मास्टरमाइंड दबोचा: फर्जी आरसी, ऑटो डीलर नेटवर्क और साइबर जाल का खुलासा

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़, 11 फरवरी।
शहर और आसपास के इलाकों में लगातार हो रही बाइक चोरी की वारदातों के पीछे काम कर रहे संगठित गिरोह की परतें अब खुलने लगी हैं। पूंजीपथरा पुलिस और साइबर थाना की संयुक्त कार्रवाई में शातिर आरोपी विकेश दास महंत (27) को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस के अनुसार, वह पूंजीपथरा, तमनार, घरघोड़ा और रायगढ़ बाजार क्षेत्र से हुई 25 बाइक चोरी की घटनाओं में संलिप्त रहा है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह के निर्देशन में चल रही कार्रवाई के तहत 9 फरवरी की शाम संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पर पुलिस टीम ने घेराबंदी कर विकेश को पकड़ा। आरोपी पूर्व में भी वाहन चोरी के मामले में जेल जा चुका है। जेल से रिहा होने के बाद उसकी गतिविधियों पर पुलिस की निगरानी बनी हुई थी।
संगठित गिरोह का सुनियोजित तंत्र
1 फरवरी को पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित प्रेस वार्ता में इस संगठित गिरोह का खुलासा किया गया था। गिरोह का तरीका बेहद शातिराना था—पहले बाइक चोरी, फिर फर्जी दस्तावेज तैयार कर बाजार में खपाना। अब तक इस नेटवर्क से जुड़े मुख्य आरोपी मुकेश सहित 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने उनके कब्जे से 25 चोरी की बाइक, एक एप्पल लैपटॉप और एक कलर प्रिंटर जब्त किया है।
जांच में सामने आया कि चोरी की बाइक को बेचने के लिए ऑटो डीलर नेटवर्क का सहारा लिया जाता था। लैलूंगा क्षेत्र से जुड़े कुछ व्यक्तियों और पूर्व कंप्यूटर ऑपरेटरों की मदद से लोक सेवा केंद्र के जरिए वाहनों के फर्जी पंजीयन और आरसी कार्ड तैयार किए जाते थे।

डिजिटल हेरफेर से तैयार होती थी फर्जी पहचान
पुलिस के अनुसार, गिरोह का सदस्य अजय पटेल चोरी की बाइक के चेसिस नंबर से असली मालिक की जानकारी निकालता था। इसके बाद ऑनलाइन पीबीसी कार्ड मंगवाकर कंप्यूटर के जरिए उसमें हेरफेर की जाती थी। तैयार की गई फर्जी आरसी और ट्रांसफर कार्ड पर कूटरचित हस्ताक्षर कर बाइक को डीलरों और आम खरीदारों के बीच बेच दिया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया में जब्त लैपटॉप और प्रिंटर का इस्तेमाल होता था।
बरामद तीन बाइकें थाना पूंजीपथरा के अपराध क्रमांक 05/2026, 09/2026 एवं 10/2026 से संबंधित पाई गई हैं। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2), 112(2) के साथ-साथ फर्जी दस्तावेज तैयार करने की धारा 317(2) और 336(3) जोड़ी गई है।
पुलिस की सख्त चेतावनी
एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह ने स्पष्ट किया है कि संगठित वाहन चोरी गिरोहों के विरुद्ध अभियान जारी रहेगा। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि संदिग्ध व्यक्ति या वाहन दिखाई देने पर तुरंत पुलिस को सूचना दें।
शहर में सक्रिय इस गिरोह की गिरफ्तारी ने यह भी साफ कर दिया है कि अपराधी अब पारंपरिक चोरी से आगे बढ़कर डिजिटल तकनीक का सहारा ले रहे हैं। ऐसे में पुलिस की साइबर निगरानी और जमीनी कार्रवाई का तालमेल ही इस तरह के संगठित अपराध पर अंकुश लगाने की कुंजी बनेगा।