जब्त गहनों पर ‘वर्दी’ का दाग: गर्भवती बर्खास्त प्रधान आरक्षक मोनिका सोनी गुप्ता गबन में गिरफ्तार, न्यायिक रिमांड पर भेजी गई

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
डेस्क, दुर्ग
दुर्ग जिले के मोहन नगर थाना क्षेत्र से सामने आया एक प्रकरण पुलिस महकमे की साख पर सीधा सवाल खड़ा कर रहा है। चोरी के मामले में जब्त किए गए सोने के जेवरात की सुरक्षित अभिरक्षा के बजाय उनके गबन का आरोप उसी महिला प्रधान आरक्षक पर लगा है, जिसे कानून की रखवाली की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बर्खास्त प्रधान आरक्षक मोनिका सोनी गुप्ता को पुलिस ने पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।
जब्ती से गबन तक: जांच में खुली परतें
सूत्रों के मुताबिक, एक पूर्व चोरी प्रकरण में बरामद सोने की ज्वेलरी को विधिवत सुरक्षित रखा जाना था। लेकिन विभागीय स्तर पर की गई पड़ताल में यह तथ्य उभरा कि जब्त सामान नियमानुसार अभिरक्षा में नहीं था। विस्तृत जांच में सामने आया कि उक्त जेवरात का दुरुपयोग स्वयं मोनिका गुप्ता द्वारा किया गया।
जैसे-जैसे दस्तावेजों और जब्ती रिकॉर्ड का मिलान हुआ, अनियमितताओं की कड़ियां जुड़ती चली गईं। अंततः पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर औपचारिक गिरफ्तारी की कार्रवाई की। मामले में गबन का अपराध दर्ज कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।
पहले भी घिरी थीं आरोपों में
यह पहला अवसर नहीं है जब मोनिका गुप्ता का नाम विवादों में आया हो। इससे पूर्व एक व्यक्ति से उसकी बेटी को नौकरी दिलाने के नाम पर अवैध राशि वसूलने का आरोप उन पर लगा था। विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित पाए गए और उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।
बताया जाता है कि उन्हें आरोप पत्र और अंतिम स्मरण पत्र जारी किए गए थे, किंतु उन्होंने अपना पक्ष प्रस्तुत नहीं किया। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उनके आचरण को गंभीर कदाचार मानते हुए उन्हें पुलिस सेवा के लिए अयोग्य घोषित किया गया।

दोहरी कार्रवाई, बढ़े सवाल
एक ओर विभागीय बर्खास्तगी, दूसरी ओर अब आपराधिक मामला—इन दोनों घटनाओं ने पुलिस महकमे में जवाबदेही और पारदर्शिता की व्यवस्था पर चर्चा तेज कर दी है। यह प्रश्न भी उठ रहा है कि जब्ती माल की निगरानी और अभिरक्षा की प्रणाली में आखिर चूक कहां हुई।
वर्दी से जुड़ी हर घटना केवल व्यक्तिगत नहीं होती; वह पूरे संस्थान की विश्वसनीयता को प्रभावित करती है। ऐसे में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सख्त रुख अपनाना और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना समय की मांग है।
आगे की जांच जारी
पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और जब्त सामग्री के मूल्यांकन सहित अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है। यदि जांच में और तथ्य सामने आते हैं तो कानूनी कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है।
फिलहाल, इस प्रकरण ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि कानून के दायरे से ऊपर कोई नहीं—चाहे वह वर्दीधारी ही क्यों न हो।