लालच के जाल में फँसा भरोसा: तंत्र-मंत्र के नाम पर ‘नोटों की बारिश’ का नाटक, दो शातिर ठग गिरफ्तार

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायपुर में तंत्र-मंत्र के सहारे रातों-रात अमीर बनने का सपना दिखाकर की गई ठगी की यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि अपराधी समाज की कमजोर कड़ी—लालच और अंधविश्वास—को सबसे पहले निशाना बनाते हैं। गुढ़ियारी थाना क्षेत्र से सामने आए इस मामले में कथित तांत्रिक और उसके साथी ने चमत्कार का ऐसा जाल बुना कि पढ़ा-लिखा व्यक्ति भी साढ़े तीन लाख रुपये गंवा बैठा।
साहूपारा, गुढ़ियारी निवासी रूस्तम कुर्रे ने थाने में दर्ज शिकायत में बताया कि उसकी मुलाकात कुछ समय पहले सुपेला, भिलाई में राहुल भारती नामक युवक से हुई थी। शुरुआती बातचीत काम की तलाश और सामान्य परिचय तक सीमित थी, लेकिन धीरे-धीरे राहुल भारती ने विश्वास की जमीन तैयार की। लगातार फोन कॉल, घर आना-जाना और अपनापन—यही वह रास्ता था, जिससे ठगी की पटकथा आगे बढ़ी।
इसी दौरान राहुल भारती ने अपने “खास संपर्क” में एक तांत्रिक मयंक दास का ज़िक्र किया, जो तंत्र-मंत्र के ज़रिये पैसों को सौ गुना करने का दावा करता था। यह दावा सुनते ही विवेक पर लालच हावी हो गया। पीड़ित ने इस तथाकथित तांत्रिक को अपने लिए काम करने की सहमति दे दी।
दिनांक 6 फरवरी की शाम मंगल बाजार, गुढ़ियारी स्थित कार्यालय में पूरा नाटक रचा गया। पूजा-पाठ का सामान, मंत्रोच्चार और रहस्यमय माहौल—सब कुछ योजनाबद्ध था। पूजा के दौरान तांत्रिक ने नकद राशि की मांग की, जिस पर रूस्तम कुर्रे ने साढ़े तीन लाख रुपये सौंप दिए। इसके बाद दोनों को बाहर बैठने को कहकर तांत्रिक देर रात तक अंदर कथित साधना करता रहा।
रात करीब साढ़े दस बजे “श्मशान की मिट्टी लाने” का बहाना बनाकर दोनों आरोपी कार्यालय से निकले और एक थैला यह कहकर दे गए कि इसमें पैसे रखे हैं। जब काफी देर तक दोनों वापस नहीं लौटे, तो पीड़ित को शंका हुई। थैले को खोलकर देखा गया तो उसमें असली नोटों की जगह नकली नोटों के बंडल निकले। तब तक ठग फरार हो चुके थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए गुढ़ियारी थाने में अपराध क्रमांक 43/26 के तहत धारा 318(4), 3(5) बीएनएस में प्रकरण दर्ज किया गया। पुलिस उपायुक्त नॉर्थ जोन मयंक गुर्जर के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त आकाश मरकाम, सहायक पुलिस आयुक्त पूर्णिमा लामा और थाना प्रभारी गुढ़ियारी के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। लगातार दबिश और तकनीकी जांच के बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पूछताछ में आरोपियों ने ठगी की वारदात कबूल की। उनके कब्जे से ठगी की पूरी नगद राशि 3,50,000 रुपये, एक मोबाइल फोन और घटना में प्रयुक्त दोपहिया वाहन जब्त किया गया। गिरफ्तार आरोपियों में राहुल भारती और मयंक दास दोनों निवासी रिसाली, भिलाई हैं।
यह घटना सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि समाज के लिए चेतावनी है। चमत्कार और शॉर्टकट अमीरी के सपने अक्सर मेहनत से नहीं, ठगी के रास्ते पर ले जाते हैं। सवाल यह नहीं कि ठग पकड़े गए, सवाल यह है कि ऐसे जाल में फँसने से पहले लोग कब सचेत होंगे।
आज जब देश डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बातें कर रहा है, उसी दौर में तंत्र–मंत्र से नोटों की बारिश कराने का झांसा देकर की गई ठगी यह सवाल खड़ा करती है कि हम सचमुच कितने आधुनिक हुए हैं। रायपुर का यह मामला किसी एक व्यक्ति की नासमझी भर नहीं, बल्कि उस सोच का परिणाम है जो मेहनत से पहले चमत्कार पर भरोसा करना चाहती है।
साहूपारा गुढ़ियारी के एक सामान्य कारोबारी का साढ़े तीन लाख रुपये यूँ ही हवा हो जाना, ठगों की चालाकी से ज्यादा समाज की कमजोर नस को उजागर करता है। राहुल भारती जैसे लोग पहले सहानुभूति, काम की तलाश और रोज़मर्रा की बातचीत से विश्वास जीतते हैं। फिर मंच पर आते हैं मयंक दास जैसे कथित तांत्रिक, जिनके पास हर समस्या का “गुप्त समाधान” और हर सवाल का “रहस्यमय जवाब” होता है।
अंधविश्वास का बाज़ार अब भी ज़िंदा है
यह पहली बार नहीं है जब तंत्र–मंत्र के नाम पर लाखों की ठगी हुई हो। फर्क बस इतना है कि पहले यह खेल गलियों और कस्बों तक सीमित था, अब शहरों के दफ्तरों और पढ़े–लिखे लोगों तक पहुँच चुका है। पूजा-पाठ, श्मशान की मिट्टी, बंद कमरा और बाहर बैठने का आदेश—यह सब कोई तंत्र नहीं, बल्कि ठगी की पुरानी और आज़माई हुई स्क्रिप्ट है।
शॉर्टकट अमीरी का सबसे बड़ा झूठ
“पैसे को 100 गुना करने” का दावा सुनते ही विवेक अक्सर लालच के सामने हार जाता है। मेहनत, धैर्य और समय—ये तीन चीज़ें अमीरी की असली पूँजी हैं, लेकिन जब आदमी इन्हें छोड़कर शॉर्टकट ढूँढने लगता है, तब ठगों के लिए रास्ता अपने आप खुल जाता है। ऐसे मामलों में पीड़ित सिर्फ पैसा नहीं गंवाता, बल्कि आत्मविश्वास और सामाजिक भरोसा भी खो देता है।
पुलिस की कार्रवाई, समाज की परीक्षा
इस प्रकरण में पुलिस की तत्परता और सख़्त कार्रवाई काबिले-तारीफ़ है। आरोपियों की गिरफ्तारी और पूरी रकम की बरामदगी से यह संदेश ज़रूर जाता है कि कानून आँख मूँदकर नहीं बैठा। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या हर बार पुलिस ही अंतिम समाधान है? क्या परिवार, समाज और शिक्षित वर्ग की जिम्मेदारी नहीं बनती कि अंधविश्वास और चमत्कार के झूठे दावों के खिलाफ खुलकर बोले?
सबक साफ़ और कड़ा है
कोई भी तांत्रिक, कोई भी मंत्र रातों-रात किस्मत नहीं बदल सकता। अगर ऐसा होता, तो देश में मेहनत करने वाला कोई गरीब न होता। यह घटना चेतावनी है—लालच जितना बड़ा होगा, ठगी का खतरा उतना ही गहरा होगा।
आज ज़रूरत है तंत्र–मंत्र से नहीं, तर्क और समझ से सोचने की। वरना अगली “नोटों की बारिश” फिर किसी और की ज़िंदगी को बर्बाद करने के लिए तैयार खड़ी होगी।