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खाकी की सख़्ती, संवेदना की मिसाल — साधना सिंह की विदाई नहीं, एक विरासत का आरंभ

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com

रायगढ़। कुछ अधिकारी सेवानिवृत्त होते हैं और कुछ अपने पीछे एक ऐसी विरासत छोड़ जाते हैं, जो लंबे समय तक व्यवस्था को दिशा देती है। छत्तीसगढ़ पुलिस की जानी-मानी, दबंग और बेदाग छवि वाली अधिकारी साधना सिंह का सेवानिवृत्त होना भी ऐसा ही एक क्षण रहा, जब औपचारिक विदाई से कहीं अधिक भावनाएं और सम्मान बोलते नजर आए।

एसपी कार्यालय रायगढ़ में आयोजित गरिमामय सम्मान समारोह में डीआईजी शशि मोहन सिंह सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, सामाजिक संगठनों और गणमान्य नागरिकों ने उन्हें सम्मानित किया। मंच से बार-बार यही बात दोहराई गई कि साधना सिंह की सेवा केवल कानून के पालन तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने पुलिसिंग को संवेदना, साहस और निष्पक्षता के साथ जिया।

मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ की “किरण बेदी” के रूप में पहचानी जाने वाली साधना सिंह ने अपने कार्यकाल में कई ऐसे निर्णय लिए, जो कठिन भी थे और मिसाल भी बने। खासकर महिला सुरक्षा, युवाओं में विश्वास और अपराध के खिलाफ कठोर रुख ने उन्हें आम जनता की नजरों में एक भरोसेमंद चेहरा बनाया।

इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता एवं प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश सचिव श्याम गुप्ता का वक्तव्य समारोह का भावनात्मक केंद्र बन गया। उन्होंने दो टूक कहा कि ईमानदार और निडर अधिकारियों पर सेवानिवृत्ति की रेखा नहीं खींची जानी चाहिए। ऐसे अधिकारी विभाग की “कोहिनूर” होते हैं, जिनका अनुभव और मार्गदर्शन सेवा के बाद भी समाज और व्यवस्था के लिए जरूरी है। उन्होंने साधना सिंह को लाखों बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि ऐसी पुलिसिंग ही लोकतंत्र की असली ताकत है।

मुंगेली जिले में एएसपी प्रभार से लेकर अपने गृह जिले में जिम्मेदारी निभाते हुए सेवानिवृत्त हुई साधना सिंह को सम्मानित करने वालों में श्याम गुप्ता के साथ जिलाध्यक्ष हिमांशु चौहान भी शामिल रहे। सम्मान के बाद का दृश्य औपचारिकता से परे था—ढोल-नगाड़े, आतिशबाजी और पारिवारिक आत्मीयता के बीच उन्हें उनके निवास तक छोड़ा गया, मानो पूरा शहर एक अधिकारी को नहीं, एक अपने को विदा कर रहा हो।

समारोह में मौजूद अधिकारियों और नागरिकों की एक ही राय थी—साधना सिंह की विदाई दरअसल पुलिस विभाग के लिए एक अध्याय का अंत नहीं, बल्कि ईमानदार और साहसी पुलिसिंग की उस परंपरा की शुरुआत है, जिसे आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी और अपनाने की कोशिश करेंगी।

Amar Chouhan

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