जिंदल स्कूल के सामने फिर दर्दनाक सड़क घटना: ट्रेलर की चपेट में आने से युवक की मौत — रायगढ़ में हर महीने औसतन 30 से अधिक जानें सड़क पर गंवाती हैं, प्रशासन की सुस्ती सवालों के घेरे में

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़ जिले में हर दिन सड़क दुर्घटना में जाती है एक जान
रायगढ़ जिले के तमनार थाना क्षेत्र अंतर्गत हुंकराडिपा–मिलुपारा रोड पर शुक्रवार दोपहर एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हुआ। ओपी जिंदल हायर सेकेंडरी स्कूल के सामने एक तेज रफ्तार ट्रेलर ने बाइक सवार युवक को अपनी चपेट में ले लिया। घटना इतने खौफनाक ढंग से हुई कि मौके पर ही युवक की मौत हो गई। घायल अवस्था में कहीं सहायता मिल पाने से पहले ही उसकी ज़िंदगी थम गई। मृतक की पहचान निरंजन सेठ उर्फ गोल्डी (लगभग 27 वर्ष), निवासी लिबरा, के रूप में हुई, जो ड्यूटी पर अनुप रोड कैरियर ट्रांसपोर्टर में कार्यरत था और कहीं जा रहा था तभी यह भयानक हादसा घटित हुआ।
स्थानीय लोगों की सूचना पर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और गुस्साए हुए लोगों ने सड़क पर चक्का जाम कर दिया, जिससे मुख्य मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। तमनार पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है और ट्रेलर चालक से पूछताछ के साथ दुर्घटना के कारणों की तह तक जाने की कोशिश कर रही है।
यह दर्दनाक घटना अकेली नहीं है। रायगढ़ जिले में बीते साल लगभग 700 सड़क दुर्घटनाओं में 382 लोगों की जानें चली गईं, यानी हर महीने औसतन 30 से अधिक लोग सड़क हादसों में अपनी ज़िंदगी खो बैठे — यह आंकड़ा गंभीर चिंता का विषय है। सड़कों पर घायलों की संख्या भी इसी अवधि में कई सौ रही है, जो बताता है कि सड़क सुरक्षा इस जिले में कितनी कमजोर है। तेज रफ्तार, अनियंत्रित वाहन, ट्रैफिक नियमों की अवहेलना, शराब पीकर ड्राइविंग और हेलमेट तथा सीट बेल्ट का न उपयोग — ये प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि सड़कें केवल यात्रा का माध्यम नहीं, बल्कि कई परिवारों के लिए रोज़मर्रा का ख़तरा बन चुकी हैं। यदि इसी तरह निगरानी व नियंत्रण ढीला रहता है, तो आगे और भी अधिक अनगिनत परिवार दुख की कगार पर होंगे।

समस्या का मूल कारण:
विश्लेषण बताते हैं कि तेज़ गति, ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन, खराब सड़कों व ब्लैक स्पॉट, और यातायात प्रबंधन की कमी प्रमुख कारक हैं। छत्तीसगढ़ में सड़क दुर्घटना दर और मौतें बढ़ रही हैं, और ब्लैक स्पॉट जैसे जोखिम-भरे स्थानों की पहचान के बावजूद पर्याप्त सुधार नहीं किए गए हैं।
प्रशासन को क्या करना चाहिए — एक संगठित रोड मैप:
1. ब्लैक स्पॉट की पहचान और सुधार: हाई-रिस्क वाले हिस्सों पर दृश्यमान चेतावनी, स्पीड ब्रेकर, बेहतर सड़कों और प्रकाश की व्यवस्था तुरंत लागू की जाए।
2. ट्रैफिक निगरानी और क़ानून सख़्ती से लागू: स्पीड कैमरे, शराब-जांच चौकियाँ और नियम उल्लंघन पर कड़े जुर्माने स्थापित।
3. जनजागरूकता और शिक्षा: स्कूलों, कॉलेजों और गांवों में नियमित रोड सेफ्टी प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम।
4. त्वरित आपात सेवाएँ: दुर्घटना के तुरंत बाद सहायता सुनिश्चित करने के लिए ट्रैफिक पुलिस और एम्बुलेंस नेटवर्क को मजबूत किया जाए।
5. सड़कों की मरम्मत और डिज़ाइन: ग्रामीण मार्गों को भी राष्ट्रीय-राज्य मानकों के अनुरूप बनाया जाए, जिससे भारी वाहनों के चलते जोखिम कम हो।

ये कदम यदि योजनाबद्ध और पारदर्शी ढंग से लागू किए जाएं, तो हादसों में कमी लाई जा सकती है और रायगढ़ की सड़कों को सुरक्षित बनाया जा सकता है। अभी की गुमराह करने वाली नीतियाँ और निष्क्रियता केवल मौतों के आंकड़ों को और बढ़ा रही हैं — और समय जल्द ही जवाब मांग रहा है।