घरघोड़ा में जनविश्वास की गूंज: सरपंच संघ जिलाध्यक्ष हिमांशु चौहान के प्रथम घरघोड़ा आगमन पर उमड़ा सम्मान का सैलाब (देखें वीडियो)

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com

घरघोड़ा।
सरपंच संघ जिला अध्यक्ष रायगढ़ हिमांशु चौहान के प्रथम घरघोड़ा आगमन पर क्षेत्र में उत्साह और आत्मीयता का ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने यह स्पष्ट कर दिया कि पंचायत प्रतिनिधित्व अब केवल पद नहीं, बल्कि जनभावनाओं का सशक्त माध्यम बन चुका है। उनके स्वागत में घरघोड़ा नगर और आसपास के ग्राम पंचायतों से आए सरपंचों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भव्य एवं गरिमामय आयोजन कर अपनी एकजुटता का परिचय दिया।
कार्यक्रम स्थल राठिया भवन, घरघोड़ा में बुके और पुष्पमालाओं से अभिनंदन किया गया जहाँ पंचायत सशक्तिकरण के नारों से वातावरण गूंजता रहा। “पंचायत सशक्त होगी, तभी गांव मजबूत होगा” जैसे उद्घोषों के बीच हिमांशु चौहान का स्वागत किया गया। यह आयोजन केवल औपचारिक स्वागत नहीं, बल्कि पंचायतों की अपेक्षाओं, भरोसे और भविष्य की दिशा का प्रतीक बनकर उभरा।
अपने संबोधन में जिलाध्यक्ष हिमांशु चौहान ने कहा कि सरपंच संघ का उद्देश्य केवल समस्याओं को उठाना नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन और मीडिया के साथ समन्वय बनाकर पंचायतों को अधिकार, सम्मान और संसाधन दिलाना है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गांवों के विकास की असली तस्वीर पंचायतों से ही निकलती है और सरपंचों की आवाज को दबने नहीं दिया जाएगा।
उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि रायगढ़ जिले की हर ग्राम पंचायत—चाहे वह दूरस्थ अंचल में हो या औद्योगिक प्रभाव क्षेत्र में—सबकी समस्याएं समान प्राथमिकता से उठाई जाएंगी। वित्तीय अधिकार, प्रशासनिक हस्तक्षेप, योजनाओं के क्रियान्वयन और पंचायत प्रतिनिधियों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर संघ मजबूती से खड़ा रहेगा।

कार्यक्रम में उपस्थित वरिष्ठ सरपंचों ने हिमांशु चौहान के नेतृत्व को समय की आवश्यकता बताया। वक्ताओं ने कहा कि उनके नेतृत्व में सरपंच संघ न केवल संगठित हुआ है, बल्कि पंचायतों के आत्मसम्मान की लड़ाई भी नए सिरे से शुरू हुई है। घरघोड़ा आगमन को संगठन के विस्तार और मजबूती की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना गया।
समारोह का समापन आपसी संवाद, संगठनात्मक चर्चा और पंचायत हितों को लेकर भविष्य की रणनीति पर विचार-विमर्श के साथ हुआ। कुल मिलाकर, हिमांशु चौहान का यह प्रथम घरघोड़ा आगमन एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि पंचायतों की एकजुट आवाज और जमीनी लोकतंत्र की मजबूत दस्तक के रूप में याद रखा जाएगा।