तमनार मामला: हाईकोर्ट की सख्ती, सरकार से जवाब तलब — कानून का मज़ाक बर्दाश्त नहीं

फ्रीलांस एडिटर अमरदीप चौहान/अमरखबर.कॉम बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ में हाल के दिनों में सामने आई कुछ शर्मनाक घटनाओं ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। खासतौर पर रायपुर और रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र की घटनाओं पर अब देश की न्यायपालिका ने सख्त रुख अपना लिया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने साफ शब्दों में कहा है कि कानून का मज़ाक उड़ाने और इंसान की इज्जत से खेलने की छूट किसी को नहीं दी जा सकती।
दरअसल, अभनपुर क्षेत्र की एक घटना की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के सामने ऐसा मामला आया, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। एक महिला को “टोनही” और “तांत्रिक” बताकर निर्वस्त्र कर गांव में घुमाया गया। पीड़िता ने मजबूर होकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इस पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस ने गहरी नाराजगी जताई और कहा कि ऐसी घटनाएं समाज में डर और असुरक्षा फैलाती हैं।
इसी सुनवाई के दौरान तमनार, रायगढ़ की वह घटना भी चर्चा में आई, जिसमें एक महिला पुलिस आरक्षक के साथ मारपीट की गई, उसकी वर्दी फाड़ी गई। इसके बाद जिस तरह से मुख्य आरोपी को अंडरवियर और फटी बनियान में, लिपस्टिक लगाकर सड़कों पर घुमाने का आरोप सामने आया, उसने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
हाईकोर्ट ने माना कि अपराधी को सजा कानून देता है, न कि भीड़ या पुलिस का कोई मनमाना तरीका। चीफ जस्टिस ने स्पष्ट कहा कि किसी भी आरोपी के साथ अमानवीय व्यवहार स्वीकार्य नहीं है, चाहे वह कितना ही बड़ा अपराधी क्यों न हो। कानून सबके लिए एक जैसा है।
इसी वजह से हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से सीधे जवाब मांगते हुए महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) को तलब किया है। कोर्ट जानना चाहती है कि तमनार की घटना में अब तक क्या कार्रवाई हुई, दोषी पुलिसकर्मियों और आरोपियों पर क्या कदम उठाए गए, और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए सरकार क्या ठोस इंतजाम कर रही है।
चीफ जस्टिस की टिप्पणी साफ संकेत देती है कि अब लापरवाही, दिखावटी कार्रवाई और मानवाधिकारों के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खासकर महिला सुरक्षा के मामलों में सरकार और पुलिस की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।
इस पूरे घटनाक्रम से एक बात तो तय है—अब कानून की निगरानी सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेगी। गांव, खेत और कस्बों में रहने वाला आम किसान और मजदूर भी यह समझ सके कि न्याय सिर्फ बड़े लोगों के लिए नहीं, बल्कि हर आम इंसान की इज्जत और सुरक्षा के लिए है।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब सबकी निगाहें सरकार के जवाब और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं। यह मामला सिर्फ तमनार या रायपुर का नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है कि कानून से ऊपर कोई नहीं।
डेस्क रिपोर्ट