रायपुर हिट-एंड-रन केस में भाजपा विधायक के पुत्र की गिरफ्तारी, सड़कों पर जवाबदेही की परीक्षा

फ्रीलांस एडिटर अमरदीप चौहान/अमरखबर.कॉम रायपुर।
राजधानी रायपुर की सड़कों पर देर रात हुई एक दुर्घटना अब केवल हिट-एंड-रन का मामला नहीं रह गई है, बल्कि यह कानून की निष्पक्षता और प्रभावशाली नामों के सामने उसकी मजबूती की कसौटी बन गई है। तेलीबांधा थाना क्षेत्र के अग्रसेन धाम चौक के पास हुए इस मामले में पुलिस ने भाजपा विधायक एवं पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह के पुत्र लक्की सिंह को गिरफ्तार कर लिया है।
घटना उस वक्त हुई जब एक तेज रफ्तार कार ने बाइक सवार युवक को जोरदार टक्कर मार दी और चालक बिना रुके मौके से फरार हो गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक सवार युवक सड़क पर दूर जा गिरा और गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल की पहचान त्रिभुवन सिंह ठाकुर के रूप में हुई है, जो पेशे से डीजे इवेंट से जुड़ा हुआ है और काम खत्म कर देर रात घर लौट रहा था।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसे के बाद कुछ पल के लिए इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने मानवीय संवेदनशीलता दिखाते हुए घायल युवक को तत्काल अस्पताल पहुंचाया और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने हालात का जायजा लिया और पीड़ित पक्ष की शिकायत के आधार पर जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले, वाहन नंबर और मूवमेंट का मिलान किया। तकनीकी साक्ष्यों की कड़ी जोड़ते हुए पुलिस उस कार तक पहुंची, जिसका संबंध लक्की सिंह से पाया गया। इसके बाद उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और फिर औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में आरोपी ने यह दलील दी कि अचानक बाइक सामने आ जाने से वाहन का संतुलन बिगड़ा और हादसा हो गया। हालांकि पुलिस का कहना है कि तेज रफ्तार, नियंत्रण की कमी और दुर्घटना के बाद मौके से फरार होना मामले को गंभीर बनाता है। फिलहाल लापरवाही से वाहन चलाने और दुर्घटना से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर वैधानिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
इधर, घायल त्रिभुवन सिंह ठाकुर की हालत अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। डॉक्टरों की टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही है। परिजन अस्पताल में डटे हुए हैं और न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसमें एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार का नाम सामने आया है। ऐसे मामलों में अक्सर पुलिस की भूमिका और निष्पक्षता पर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि इस कार्रवाई से यह संदेश जरूर गया है कि सड़क पर कानून किसी पद, पहचान या रसूख को नहीं देखता।
घटना ने राजधानी में तेज रफ्तार, रात के समय लापरवाह वाहन संचालन और सड़क अनुशासन को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई सिर्फ एक उदाहरण बनकर रह जाएगी, या फिर इससे शहर की सड़कों पर जिम्मेदारी और सावधानी की संस्कृति भी मजबूत होगी।