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औद्योगिक लापरवाही पर सख्ती: सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर रायगढ़ के तीन बड़े कारखानों के खिलाफ आपराधिक केस

फ्रीलांस एडिटर अमरदीप चौहान/अमरखबर.कॉम रायगढ़। जिले में लगातार सामने आ रही औद्योगिक दुर्घटनाओं को अब प्रशासन ने गंभीर चेतावनी के तौर पर लेना शुरू कर दिया है। श्रमिकों की जान जोखिम में डालने वाली लापरवाहियों पर औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए तीन औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की है। यह कार्रवाई न केवल संबंधित कारखानों के लिए, बल्कि पूरे औद्योगिक क्षेत्र के लिए एक स्पष्ट संदेश मानी जा रही है कि सुरक्षा मानकों से समझौता अब भारी पड़ सकता है।

उप संचालक औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा राहुल पटेल द्वारा किए गए निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि कुछ कारखानों में बुनियादी सुरक्षा प्रावधानों का पालन नहीं किया जा रहा है। निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर कारखाना अधिनियम 1948 एवं छत्तीसगढ़ कारखाना नियमावली 1962 के तहत कुल तीन आपराधिक प्रकरण श्रम न्यायालय रायगढ़ में दर्ज किए गए हैं।

इन कारखानों पर गिरी गाज

जिन औद्योगिक इकाइयों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है, उनमें चिरईपानी स्थित मेसर्स सुनील इस्पात एंड पावर प्रा.लि., पूंजीपथरा के ओ.पी. जिंदल इंडस्ट्रियल पार्क में संचालित मेसर्स आर.एस. इस्पात तथा जामगांव स्थित मेसर्स एमएसपी स्टील एंड पावर लिमिटेड शामिल हैं। इन कारखानों के अधिभोगियों और प्रबंधकों पर विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर श्रम न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है।

सुरक्षा में चूक को माना गया गंभीर अपराध

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, निरीक्षण के दौरान मशीनों की सुरक्षा, श्रमिकों के लिए आवश्यक सेफ्टी गियर, कार्यस्थल की संरचना और आपातकालीन प्रबंधन से जुड़े कई अहम बिंदुओं में खामियां पाई गईं। इन्हीं कमियों के चलते औद्योगिक दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है, जो सीधे तौर पर श्रमिकों की जान से जुड़ा विषय है।

स्पष्ट संदेश: समझौते की कोई गुंजाइश नहीं

औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग ने साफ शब्दों में कहा है कि श्रमिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले कारखानों के खिलाफ आगे भी इसी तरह की कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

उद्योग प्रबंधन के लिए चेतावनी

इस कार्रवाई को औद्योगिक प्रबंधन के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। जिले में तेजी से बढ़ते औद्योगीकरण के बीच यदि सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज किया गया, तो न केवल कानूनी कार्रवाई होगी, बल्कि भविष्य में और सख्त कदम भी उठाए जा सकते हैं। प्रशासन का यह कदम श्रमिकों के हित में एक जरूरी और समयोचित हस्तक्षेप माना जा रहा है।

समाचार सहयोगी सिकंदर चौहान

Amar Chouhan

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