लैलूंगा बॉर्डर पर नशे के नेटवर्क पर शिकंजा—एनडीपीएस के फरार आरोपी की गिरफ्तारी, अवैध परिवहन की कड़ियां फिर उजागर

फ्रीलांस एडिटर अमरदीप चौहान/अमरखबर.कॉम रायगढ़/लैलूंगा, 28 दिसंबर।
लैलूंगा पुलिस ने नारकोटिक्स एक्ट के एक पुराने और गंभीर मामले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। थाना प्रभारी उप निरीक्षक गिरधारी साव के नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई को सीमावर्ती क्षेत्र में सक्रिय अवैध नशा परिवहन के खिलाफ एक अहम कदम माना जा रहा है।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान रितेश यादव (20 वर्ष), पिता जयराम यादव, निवासी पीठाआमा, थाना बागबहार, जिला जशपुरनगर के रूप में हुई है। आरोपी के खिलाफ विशेष न्यायालय एनडीपीएस एक्ट, रायगढ़ द्वारा गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था। पुलिस के अनुसार, रितेश यादव लंबे समय से फरार था और लगातार ठिकाने बदलकर कानून से बचने की कोशिश कर रहा था। सतत पतासाजी और तकनीकी इनपुट के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया।
क्या था पूरा मामला
मामले की जड़ 13 मई 2025 की है, जब लैलूंगा पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम को सूचना मिली थी कि ओडिशा से गांजा की बड़ी खेप छत्तीसगढ़ में खपाने के लिए लाई जा रही है। सूचना के आधार पर पाकरगांव के जंगल मार्ग में घेराबंदी कर रेड की गई। कार्रवाई के दौरान दो कारों में सवार चार तस्करों में से एक आरोपी पुरेंद्र यादव को मौके से पकड़ लिया गया, जबकि उसके तीन साथी अंधेरे और जंगल का फायदा उठाकर फरार हो गए थे।
पूछताछ में पुरेंद्र यादव ने खुलासा किया कि वह अपने साथियों रितेश यादव, युगल यादव और यदुमणि यादव के साथ मिलकर ओडिशा से गांजा लाकर छत्तीसगढ़ में बिक्री करता था। तस्करी के लिए ग्लेंजा कार क्रमांक CG-14-MO-8202 और स्विफ्ट कार क्रमांक CG-10-AT-6949 का इस्तेमाल किया जा रहा था, जिसमें से एक वाहन पर फर्जी नंबर प्लेट भी लगी हुई थी।
इस कार्रवाई में पुलिस ने 61 किलो गांजा, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 6 लाख 10 हजार रुपये बताई गई, जब्त किया था। दोनों वाहनों को भी सीज कर थाना लैलूंगा में अपराध क्रमांक 128/2025 के तहत धारा 20(बी) और 29 एनडीपीएस एक्ट में मामला दर्ज किया गया था।
लैलूंगा बॉर्डर पर अवैध परिवहन की चुनौती
पुलिस सूत्रों के अनुसार, लैलूंगा क्षेत्र ओडिशा–छत्तीसगढ़ सीमा से सटा होने के कारण लंबे समय से अवैध परिवहन और नशा तस्करी के लिए संवेदनशील माना जाता है। जंगल मार्ग, कच्ची सड़कें और सीमावर्ती गांव तस्करों के लिए आसान रास्ते बन जाते हैं। गांजा तस्करी के साथ-साथ अवैध शराब और अन्य प्रतिबंधित सामग्री की आवाजाही की शिकायतें भी समय-समय पर सामने आती रही हैं।
हालिया गिरफ्तारी को पुलिस प्रशासन इस दृष्टि से अहम मान रहा है कि इससे न सिर्फ पुराने मामले में कार्रवाई पूरी हुई है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्र में सक्रिय नेटवर्क को भी स्पष्ट संदेश गया है। पुलिस का कहना है कि फरार अन्य आरोपियों की तलाश जारी है और सीमा क्षेत्र में निगरानी और सख्त की जाएगी।
लैलूंगा पुलिस की यह कार्रवाई बताती है कि नशे के अवैध कारोबार में शामिल लोगों के लिए अब बच निकलना आसान नहीं होगा। कानून की नजर भले देर से पड़े, लेकिन एक-एक कड़ी को जोड़ते हुए वह अंततः तस्करी के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश में है।
समाचार सहयोगी रोशन यादव