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रायगढ़ में घरेलू विवाद ने ली जान, पत्नी की पिटाई से मौत… पति को कोर्ट ने सुनाई दस साल की सजा

फ्रीलांस एडिटर अमरदीप चौहान/अमरखबर.कॉम रायगढ़। घरेलू कलह कब खौफनाक मोड़ ले ले, कहा नहीं जा सकता। रायगढ़ जिले में एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जिसने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया। खाना बनाने को लेकर हुए मामूली विवाद ने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया और पति की बेरहम पिटाई से 36 वर्षीय विमला चौहान की असमय मौत हो गई। अब जिला एवं सत्र न्यायालय रायगढ़ ने इस निर्मम कृत्य पर कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी पति को दस वर्ष सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है।

कैसे भड़का विवाद?

अभियोजन के अनुसार घटना ग्राम पंचायत बाम्हनपाली की है। 11 नवंबर 2024 की शाम सरपंच पति दयाराम राठिया को फोन पर सूचना मिली कि गांव में एक महिला गंभीर हालत में है। जब वे मौके पर पहुंचे तो पता चला कि विमला चौहान अपने पति के पड़ोसी अतर खड़िया के घर बैठी थी।

इसी दौरान आरोपी पति वहां पहुंचा और पत्नी को खाना बनाने के लिए कहा। इस पर विमला ने साफ शब्दों में कह दिया कि वह आज से उसके लिए खाना नहीं बनाएगी। बात बस इतनी सी थी, लेकिन आरोपी आगबबूला हो उठा और उसने पत्नी को बाल पकड़कर घसीटा, कमरे में ले गया और मारपीट शुरू कर दी।

डंडे से पिटाई, फिर खून धोकर अस्पताल ले गया

गवाहों और चिकित्सा रिपोर्ट के अनुसार आरोपी ने लकड़ी के डंडे से पत्नी पर ताबड़तोड़ प्रहार किए। कई गंभीर चोटें लगीं। घटना के बाद लोगों की नजर न पड़े इसलिए आरोपी ने कमरे से खून साफ किया और घायल पत्नी को खरसिया सिविल अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।

मामला दर्ज, गिरफ्तारी और कोर्ट का फैसला

खरसिया पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत आरोपी के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। अदालत में दोनों पक्षों की विस्तृत सुनवाई के बाद यह स्पष्ट हो गया कि महिला की मौत उसकी पिटाई से ही हुई थी।

अतः कोर्ट ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (गैर-इरादतन हत्या) के तहत दस वर्ष का सश्रम कारावास और 100 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर एक दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। मामले की पैरवी लोक अभियोजक पी.एन. गुप्ता ने की।

घरेलू हिंसा के बढ़ते मामलों पर फिर सवाल

यह मामला केवल एक अपराध की कहानी नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाता सच है कि घरेलू हिंसा कितनी घातक हो सकती है। मामूली तकरार का बहकापन न सिर्फ दो रिश्तों को तोड़ देता है बल्कि कई जीवन भी उजाड़ देता है।

रायगढ़ और आसपास ऐसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जो चिंता का विषय है। कानून अपना काम कर रहा है, लेकिन समाज में जागरूकता और संवेदनशीलता की जरूरत पहले से कहीं अधिक बढ़ चुकी है।

समाचार सहयोगी सिकंदर चौहान

Amar Chouhan

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