तेज रफ्तार ट्रेलर ने छीनी जिंदगी: हेलमेट भी न बचा सका जान
तमनार औद्योगिक कॉरिडोर में मौत की रफ्तार ने बढ़ाई बाइक सवारों की चिंता

फ्रीलांस एडिटर अमरदीप चौहान/अमरखबर.कॉम
तमनार–रायगढ़, छत्तीसगढ़।
औद्योगिक ट्रकों की अंधाधुंध रफ्तार और लापरवाह परिवहन प्रबंधन ने आज एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या औद्योगिक क्षेत्र की सड़कों पर अब हेलमेट भी सुरक्षा की गारंटी नहीं रहा?
सुबह करीब 4 बजे धौंराभांठा–खुरुसलेगा मुख्य मार्ग पर हुए भीषण सड़क हादसे में हेलमेट पहने बाइक सवार युवक की मौत ने पूरी व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है।
ड्यूटी जा रहे युवक की दर्दनाक मौत
मृतक की पहचान ग्राम जोबरो निवासी अमरसाय राठिया (30) के रूप में हुई है।
जानकारी के अनुसार अमरसाय A-शिफ्ट की ड्यूटी के लिए सुबह जल्दी निकले थे। जैसे ही वह धौंराभांठा शराब भट्टी के निकट पहुँचे, उसी समय विपरीत दिशा से आ रहे तेज रफ्तार ट्रेलर ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयंकर थी कि अमरसाय बाइक समेत काफी दूर तक घसीटते चले गए।
सबसे पीड़ादायक बात यह रही कि अमरसाय ने हेलमेट पहन रखा था, फिर भी सिर पर गंभीर चोटें आईं। अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उन्होंने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया।
औद्योगिक यातायात प्रणाली पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि तमनार–रायगढ़ औद्योगिक बेल्ट में भारी वाहनों की रफ्तार पर बिल्कुल नियंत्रण नहीं है।
ओवरस्पीड
ओवरलोड
रात में हाइबीम
अनफिट ट्रेलर
शराब के नशे में वाहन चलाना
इन सब पर कुशल निगरानी का अभाव है, जिसके कारण आम नागरिकों की जान रोजाना खतरे में रहती है।
हेलमेट भी नहीं दे पा रहा सुरक्षा का भरोसा
यातायात पुलिस कई बार
हेलमेट अभियान,
चालान वसूली,
जागरूकता कार्यक्रम
चलाती है।
लेकिन इस घटना ने यह साबित कर दिया कि जब हादसे की वजह तेज रफ्तार और भारी वाहन की लापरवाही हो, तब हेलमेट भी जान बचाने में असमर्थ हो जाता है।
स्थानीय बाइक सवारों के माथे पर अब भय और चिंता की लकीरें साफ झलक रही हैं।
लोग कह रहे हैं—
> “हम नियमों का पालन करते हैं, हेलमेट लगाते हैं… लेकिन क्या भारी वाहन चालक भी नियम मानते हैं? क्या हमारी जान इतनी सस्ती है?”
ग्रामीणों में आक्रोश, कार्रवाई की मांग
हादसे के बाद क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है। ग्रामीणों ने घटना स्थल पर भारी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही के विरुद्ध आवाज उठाई और प्रशासन से मांग की कि—
औद्योगिक मार्गों पर स्पीड कंट्रोल लागू हो
ड्रंक एंड ड्राइव चेकिंग हो
ओवरलोड ट्रेलरों पर कड़ी कार्रवाई हो
रात में भारी वाहनों के संचालन पर सीमित प्रतिबंध लगाए जाएँ
दुर्घटनास्थल को ब्लैक स्पॉट घोषित किया जाए
सिर्फ हेलमेट नहीं—सिस्टमेटिक सुधार की जरुरत
विशेषज्ञों का कहना है कि हेलमेट महत्वपूर्ण है, लेकिन अकेला उपाय नहीं।
सड़क सुरक्षा तभी सुनिश्चित हो सकती है जब—
सड़कें सुरक्षित हों
भारी वाहन नियंत्रित हों
पुलिस की निगरानी नियमित हो
औद्योगिक प्रबंधन जवाबदेह बने
अमरसाय राठिया की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है और इस बात की कड़वी याद दिलाई है कि औद्योगिक विकास के बीच आम नागरिकों की जान सबसे आसान कीमत बन चुकी है।
अगर समय रहते सुधार नहीं हुए तो ऐसे हादसों का सिलसिला जारी रहेगा—और हेलमेट भी शायद अब सुरक्षा का पर्याय नहीं रह जाएगा।
समाचार सहयोगी नरेश राठिया के साथ सिकंदर चौहान,अमरखबर