धान खरीदी पर प्रशासन की कड़ी नजर: मुकडेगा केंद्र के सहायक प्रबंधक लगातार अनुपस्थिति के बाद निलंबित, ESMA के तहत सख्ती तेज
फ्रीलांस एडिटर अमरदीप चौहान/अमरखबर.कॉम
रायगढ़, 29 नवंबर 2025
धान खरीदी जैसे अत्यधिक संवेदनशील और किसानों से सीधे जुड़े जनहित के कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी—जिला प्रशासन ने यह संदेश एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन को पारदर्शी, व्यवस्थित और समयबद्ध रखने के लिए कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने सभी उपार्जन केंद्रों पर सख्त निगरानी के निर्देश दिए हैं। इसी सतर्कता का परिणाम है कि मुकडेगा धान खरीदी केंद्र के सहायक समिति प्रबंधक तेलूराम सिदार को लगातार अनुपस्थिति और लापरवाही के चलते तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
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निरीक्षण में खुली अनियमितताओं की परत—प्रबंधक गायब, केंद्र असुविधा में
सहकारिता विभाग के प्रभारी उप आयुक्त द्वारा की गई निरीक्षण प्रक्रिया में यह पाया गया कि मुकडेगा केंद्र के सहायक समिति प्रबंधक लगातार ड्यूटी से अनुपस्थित थे।
लैलूंगा विकासखंड के सहकारिता विस्तार अधिकारी के प्रतिवेदन ने भी पुष्टि की कि निरीक्षण के समय तेलूराम सिदार केंद्र पर मौजूद नहीं थे।
धान खरीदी जैसी प्रक्रिया, जहां हर मिनट महत्वपूर्ण होता है और किसान लंबे इंतजार के बाद अपना अनाज बेचने पहुंचते हैं, वहां जिम्मेदार अधिकारी का इस तरह गायब होना प्रशासन के लिए गंभीर लापरवाही और किसानों के लिए सीधी परेशानी का कारण बन रहा था।
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केंद्र की कार्यप्रणाली प्रभावित — प्रशासन ने माना ‘गंभीर कर्तव्यहीनता’
आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित मुकडेगा (संख्या 177) में उपार्जन कार्य प्रभावित हो रहा था।
जिला प्रशासन ने इसे—
कर्तव्य में उदासीनता,
जिम्मेदारीहीन आचरण,
तथा अनुशासनहीनता
की श्रेणी में रखते हुए तुरंत प्रभाव से कार्रवाई की।
यह कार्रवाई न केवल एक अधिकारी पर दंडात्मक कदम है, बल्कि पूरे जिले के उपार्जन केंद्रों के लिए स्पष्ट संदेश भी है कि प्रशासन अब किसी भी लापरवाही को नजरअंदाज नहीं करेगा।
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धान खरीदी कर्मचारियों पर लागू है ESMA: छोटी भूल भी बनेगी बड़ी कार्रवाई का आधार
राज्य शासन द्वारा 15 नवंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक धान खरीदी कार्य में संलग्न सभी कर्मचारियों पर
छत्तीसगढ़ आवश्यक सेवा संधारण एवं विच्छिन्नता निवारण अधिनियम 1979 (ESMA Act 1979) लागू है।
इस अधिनियम के तहत—
किसी भी प्रकार की लापरवाही,
देर से पहुंचना,
केंद्र से अनुपस्थित रहना,
या प्रक्रिया में बाधा पहुंचाने वाला कोई भी कृत्य
गंभीर अनुशासनहीनता माना जाता है और त्वरित निलंबन/विभागीय कार्रवाई की श्रेणी में आता है।
तेलूराम सिदार के निलंबन के पीछे भी यही कानूनी कठोरता लागू की गई है।
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कलेक्टर चतुर्वेदी ने दिया सख्त संदेश—“किसानों की परेशानी बर्दाश्त नहीं”
कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने स्पष्ट कहा है कि—
धान खरीदी की प्रक्रिया पूर्णतः निर्बाध
किसानों को बिना किसी देरी के सुविधा
और केंद्रों पर समयबद्ध संचालन
प्रशासन की शीर्ष प्राथमिकता है।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जिले के सभी उपार्जन केंद्रों की नियमित और कड़ाई से मॉनिटरिंग जारी रहेगी और जहां भी शिथिलता दिखेगी, वैसी ही सख्त कार्रवाई तुरंत की जाएगी।
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प्रशासन की कार्रवाई से किसान-हित को मजबूती
इस निलंबन के बाद किसानों में यह संदेश गया है कि प्रशासन पूरी तत्परता और जिम्मेदारी के साथ उनके धान उपार्जन प्रक्रिया को प्राथमिकता दे रहा है। वर्षभर मेहनत कर उत्पादन करने वाले किसानों के हितों की रक्षा को लेकर शासन की प्रतिबद्धता इस कार्रवाई में साफ झलकती है।
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मुकडेगा केंद्र के सहायक समिति प्रबंधक का निलंबन केवल एक विभागीय कार्रवाई नहीं, बल्कि धान खरीदी व्यवस्था की गंभीरता और प्रशासन की जवाबदेही का सशक्त उदाहरण है।
जिला प्रशासन की यह कड़ी कार्यवाही आने वाले दिनों में अन्य केंद्रों के लिए भी मार्गदर्शक सिद्ध होगी, ताकि खरीफ विपणन सीजन बिना किसी अवरोध, अनियमितता और लापरवाही के सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।