होटल की मेज़ से थाने तक: कारोबारी–डीएसपी गठजोड़ पर गिरी गाज, जांच रिपोर्ट ने खोली ‘गोपनीय सौदों’ की परत

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायपुर।
राजधानी रायपुर के एक होटल में शुरू हुआ कारोबारी–पुलिस अफसर का विवाद अब महज़ निजी टकराव नहीं रह गया है। गृह विभाग की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद यह मामला प्रशासनिक नैतिकता और पुलिस तंत्र की साख पर सीधा सवाल बन गया है। रिपोर्ट में चौंकाने वाला दावा किया गया है कि डीएसपी स्तर के अधिकारी ने न केवल एक होटल कारोबारी से महंगे उपहार और नकद लाभ स्वीकार किए, बल्कि व्हाट्सएप चैट के ज़रिये विभागीय गोपनीय जानकारियां भी साझा कीं।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, होटल में बेहद कम दरों पर आयोजित बैठकों के दौरान “चॉकलेट और कन्फिडेंशियल” सूचनाओं का लेन-देन हुआ। यह शब्द अब केवल मुहावरा नहीं, बल्कि जांच का केंद्रीय बिंदु बन गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कारोबारी हितों के बदले पुलिसिया प्रभाव का इस्तेमाल किया गया, जो सेवा आचरण नियमों का खुला उल्लंघन है।
रिपोर्ट आते ही सरकार हरकत में, डीएसपी तत्काल निलंबित
जैसे ही गृह विभाग की जांच रिपोर्ट शासन स्तर पर पहुंची, राज्य सरकार ने बिना देर किए संबंधित डीएसपी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। सूत्रों के अनुसार, यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि मामला केवल आचरण का नहीं, बल्कि संभावित आपराधिक कृत्य की ओर इशारा करता है।
सरकारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि निलंबन अवधि के दौरान अधिकारी को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा, लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया गया है कि जांच के दायरे से कोई भी पहलू बाहर नहीं रखा जाएगा। राजभवन के नाम से जारी आदेश ने संकेत दे दिया है कि यह मामला दबाने नहीं, उदाहरण बनाने की दिशा में बढ़ रहा है।
सवाल जो अब टाले नहीं जा सकते
इस पूरे प्रकरण ने कई असहज सवाल खड़े कर दिए हैं—
क्या पुलिस अफसरों और बड़े कारोबारियों के बीच यह ‘सांठगांठ’ कोई नया खेल है?
क्या होटल के बंद कमरों में प्रशासनिक फैसलों की पटकथा लिखी जा रही थी?
और सबसे अहम—अब तक ऐसे कितने मामलों पर चुप्पी साधी गई?
जांच जारी, अगली कार्रवाई तय करेगी दिशा
फिलहाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी खत्म नहीं हुई है। रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर अनुशासनात्मक के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। संकेत साफ हैं—अगर आरोप प्रमाणित हुए, तो मामला निलंबन तक सीमित नहीं रहेगा।
यह प्रकरण केवल एक अधिकारी या एक कारोबारी का नहीं, बल्कि उस सिस्टम का है, जहां सत्ता, पैसा और वर्दी एक ही मेज़ पर बैठ जाएं। अब देखना यह है कि जांच की आंच सिर्फ फाइलों तक सीमित रहती है या सच में व्यवस्था को झुलसाती है।