Latest News

स्थायी नौकरी से बेदखली तक: गारे पेल्मा IV/5 में कर्मचारियों के साथ हुआ “हस्तांतरण न्याय” का सबसे कड़वा अध्याय

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com

रायगढ़। कंपनी के जिन कर्मचारियों ने वर्षों तक खदान, उत्पादन और डिस्पैच की धूल–धूप में अपनी जवानी खपा दी, आज वही लोग रोज़गार की चौखट से बाहर खड़े हैं। खुद को “स्थायी (Permanent)” कहे जाने का भरोसा जिनके लिए सुरक्षा कवच था, वही भरोसा एक ई-मेल के साथ अचानक टूट गया।

गारे पाल्मा IV/5 खदान वर्ष 2020 से बंद बताई जाती रही। इसके बावजूद यहां के स्थायी कर्मचारियों को IV/4 और अन्य यूनिटों में लगातार कार्य पर लगाया गया। यानी कंपनी को उनके अनुभव, श्रम और दक्षता की आवश्यकता बनी रही। सवाल यह नहीं था कि काम है या नहीं—सवाल यह था कि काम किससे कराया जा रहा है।

01 जुलाई 2025 को गारे पाल्मा IV/5 का हस्तांतरण शारदा एनर्जी एंड मिनरल्स लिमिटेड को हुआ। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि वर्षों की सेवा, स्थायी नियुक्ति और निरंतर कार्य का अनुभव उनके भविष्य को सुरक्षित रखेगा। लेकिन 15 दिसंबर 2025 को भेजे गए एक ई-मेल ने सैकड़ों परिवारों की नींव हिला दी। दिसंबर के महीने में, बिना किसी व्यक्तिगत संवाद, बिना मानवीय संवेदना—सैकड़ों कर्मचारियों को नौकरी से बाहर कर दिया गया।

यह फैसला सिर्फ चौंकाने वाला नहीं था, बल्कि कर्मचारियों के सम्मान और अधिकारों पर सीधा आघात था। अचानक रोज़गार छिनने का असर केवल वेतन पर्ची तक सीमित नहीं रहा। होम लोन की किस्तें, बच्चों की पढ़ाई, बुज़ुर्गों का इलाज और घर का चूल्हा—सब कुछ एक झटके में संकट में आ गया।

कंपनी का तर्क सामने आया कि IV/5 में कर्मचारियों की आवश्यकता नहीं है। लेकिन यही तर्क खुद अपने भीतर कई सवाल समेटे हुए है। अगर आवश्यकता नहीं थी, तो हस्तांतरण के बाद IV/5 में नई नियुक्तियाँ क्यों की गईं? किस आधार पर नए लोगों को जगह दी गई और वर्षों से काम कर रहे स्थायी कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया?

और भी गंभीर सवाल तब खड़े होते हैं जब यह तथ्य सामने आता है कि कुछ स्थानीय लोगों या प्रभावशाली नेताओं की पहुंच वाले कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, जबकि अन्य को चुन-चुनकर हटाया गया। समान परिस्थितियों में अलग-अलग मापदंड—क्या यही औद्योगिक न्याय है?

सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि स्वयं कंपनी के HR Head आज भी IV/5 में कार्यरत हैं। यदि वहां न काम था, न आवश्यकता, तो यह उपस्थिति किस नियम के तहत है? यह स्थिति कंपनी के आधिकारिक दावों पर ही प्रश्नचिह्न नहीं लगाती, बल्कि पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी संदेह पैदा करती है।

पीड़ित कर्मचारी किसी टकराव की भाषा नहीं बोल रहे। न वे विशेष सुविधा मांग रहे हैं, न किसी अनुचित लाभ की अपेक्षा कर रहे हैं। उनकी मांग सीधी और मानवीय है—न्याय, पारदर्शिता और सम्मानजनक व्यवहार। वर्षों की सेवा का मूल्य एक ई-मेल में शून्य न किया जाए।

गारे पाल्मा IV/5 का यह प्रकरण अब केवल एक औद्योगिक निर्णय नहीं रहा। यह उस सोच की परीक्षा है, जिसमें स्थायी कर्मचारी भी अस्थायी बना दिए जाते हैं, और जहां “हस्तांतरण” के नाम पर जिम्मेदारियों का हस्तांतरण तो होता है, लेकिन इंसानों की जिम्मेदारी कोई नहीं लेता।

Amar Chouhan

AmarKhabar.com एक हिन्दी न्यूज़ पोर्टल है, इस पोर्टल पर राजनैतिक, मनोरंजन, खेल-कूद, देश विदेश, एवं लोकल खबरों को प्रकाशित किया जाता है। छत्तीसगढ़ सहित आस पास की खबरों को पढ़ने के लिए हमारे न्यूज़ पोर्टल पर प्रतिदिन विजिट करें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button