सोनाजोरी की घटना: लैलूंगा दुष्कर्म प्रकरण में 12 घंटे में गिरफ्तारी, पुलिस की त्वरित कार्रवाई से सख्त संदेश

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़, 18 फरवरी।
जिले के लैलूंगा क्षेत्र में दो नाबालिग बालिकाओं के साथ दुष्कर्म की घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। सोनाजोरी जंगल में घटित इस वारदात में पुलिस ने उल्लेखनीय तत्परता दिखाते हुए रिपोर्ट दर्ज होने के 12 घंटे के भीतर मुख्य आरोपी और उसके सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने स्वयं संज्ञान लेते हुए त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नाबालिगों के विरुद्ध जघन्य अपराधों में किसी प्रकार की नरमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रेमजाल से जंगल तक
थाना लैलूंगा में 16 फरवरी को दो नाबालिग बालिकाएं अपने परिजनों के साथ पहुंचीं और लैलूंगा निवासी युवक ओमप्रकाश पैंकरा उर्फ प्रकाश उर्फ राहुल पैंकरा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। 17 वर्षीय पीड़िता के अनुसार, दिसंबर 2025 में मोबाइल के माध्यम से आरोपी से परिचय हुआ था। शादी का झांसा देकर आरोपी ने उसे लैलूंगा बुलाया।
14 फरवरी को वह अपनी 16 वर्षीय सहेली के साथ पत्थलगांव मार्ग से बस द्वारा लैलूंगा पहुंची। अटल चौक से आरोपी और उसका साथी जयकिशन धोबा मोटरसाइकिल क्रमांक CG 13 MU 3456 से दोनों को ग्राम सोनाजोरी ले गए। आरोप है कि सोनाजोरी जंगल में मुख्य आरोपी ने पहले एक बालिका के साथ और फिर उसकी सहेली के साथ दुष्कर्म किया तथा घटना उजागर करने पर धमकी दी।

संगीन धाराओं में मामला दर्ज
दोनों पीड़िताओं के अलग-अलग आवेदन पर अपराध क्रमांक 50/2026 और 51/2026 पंजीबद्ध किए गए हैं। प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता की धारा 70 तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 4 एवं 6 के तहत अपराध दर्ज किया गया है। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल जब्त कर ली है। पूछताछ में मुख्य आरोपी द्वारा अपराध स्वीकार करने की जानकारी सामने आई है, जबकि सहयोगी की भूमिका भी स्थापित पाई गई।

12 घंटे में गिरफ्तारी
एसडीओपी धरमजयगढ़ के पर्यवेक्षण में थाना प्रभारी उपनिरीक्षक गिरधारी साव और उनकी टीम ने सघन छापेमारी कर दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया। विधिवत गिरफ्तारी के बाद न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस टीम में संध्या रानी कोका, प्रधान आरक्षक नंद कुमार पैंकरा सहित अन्य जवानों की सक्रिय भूमिका रही।
अभिभावकों के लिए चेतावनी
यह घटना केवल अपराध का मामला नहीं, बल्कि सामाजिक चेतावनी भी है। मोबाइल और सोशल मीडिया के माध्यम से बनते संबंधों में किशोर-किशोरियों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों को सजग रहना होगा। भावनात्मक प्रलोभन और झूठे वादों के जरिए नाबालिगों को फंसाने की प्रवृत्ति चिंताजनक रूप लेती जा रही है।
लैलूंगा का यह प्रकरण स्पष्ट करता है कि कानून की पकड़ से बचना आसान नहीं, परंतु समाज की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने यह भरोसा दिलाया है कि नाबालिगों के साथ अन्याय करने वालों के लिए कानून कठोर है — और रहेगा।