Latest News

सुरों की विरासत खामोश: आशा भोसले के निधन से संगीत जगत में अपूरणीय शून्य

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com

मुंबई। भारतीय सिनेमा और संगीत की वह आवाज, जिसने सात दशकों तक हर दौर, हर भावना और हर पीढ़ी को अपनी धुनों में पिरोए रखा, अब सदा के लिए थम गई। दिग्गज पार्श्व गायिका आशा भोसले का रविवार को 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। चिकित्सकों के अनुसार, मल्टी-ऑर्गन फेलियर उनके निधन का प्रमुख कारण रहा।

परिवार की ओर से उनके पुत्र आनंद भोसले ने इस दुखद समाचार की पुष्टि की। जानकारी के मुताबिक, सोमवार को लोअर परेल स्थित उनके आवास ‘कासा ग्रांडे’ में अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव शरीर रखा जाएगा, जिसके बाद शाम को शिवाजी पार्क में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।

बताया जाता है कि बीते शनिवार शाम अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। प्रारंभिक तौर पर चेस्ट इन्फेक्शन की शिकायत सामने आई, लेकिन देखते ही देखते हालत गंभीर होती चली गई। परिवार और प्रशंसकों की दुआएं भी उन्हें बचा नहीं सकीं। उनके निधन की खबर फैलते ही फिल्म इंडस्ट्री से लेकर राजनीतिक गलियारों तक शोक की लहर दौड़ गई।

लता मंगेशकर की छोटी बहन के रूप में पहचानी जाने वाली आशा भोसले ने अपनी अलग पहचान बनाई—एक ऐसी गायिका, जिसकी आवाज में शास्त्रीयता की गहराई भी थी और आधुनिकता की चंचलता भी। संगीतकारों का मानना है कि उनकी तरह बहुमुखी प्रतिभा सदियों में एक बार ही जन्म लेती है।

8 सितंबर 1933 को जन्मी आशा भोसले का सफर बेहद संघर्षपूर्ण, लेकिन उतना ही प्रेरणादायक रहा। महज 10 वर्ष की उम्र में गायन शुरू करने वाली इस कलाकार ने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा। उन्होंने 20 से अधिक भाषाओं में 12 हजार से ज्यादा गीत गाए—एक ऐसा रिकॉर्ड, जिसे आज भी संगीत जगत में मील का पत्थर माना जाता है। उन्हें पद्म विभूषण, दादासाहेब फाल्के पुरस्कार, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर अवार्ड्स सहित अनेक सम्मानों से नवाजा गया।

‘दम मारो दम’, ‘पिया तू अब तो आजा’, ‘चुरा लिया है तुमने’, ‘इन आंखों की मस्ती के’ जैसे गीतों में उनकी आवाज ने जो जादू बिखेरा, वह आज भी उतना ही ताजा और जीवंत महसूस होता है।

व्यक्तिगत जीवन भी किसी कहानी से कम नहीं रहा। कम उम्र में परिवार की इच्छा के विरुद्ध विवाह, फिर संघर्षों से भरा दौर और उसके बाद संगीतकार आर. डी. बर्मन के साथ उनकी जुगलबंदी—इन सबने मिलकर उनके जीवन को एक जीवंत गाथा बना दिया। पंचम दा के साथ उनकी जोड़ी ने हिंदी फिल्म संगीत को कई कालजयी धुनें दीं, जो आज भी श्रोताओं के दिलों में बसी हैं।

आशा भोसले का जाना केवल एक कलाकार का अंत नहीं, बल्कि भारतीय संगीत के एक स्वर्णिम युग का अवसान है। उनकी आवाज भले ही अब खामोश हो गई हो, लेकिन उनके गीत आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा और आनंद का स्रोत बने रहेंगे।

अन्य अधिक खबरों के लिए क्लिक करें https://amarkhabar.com/

Amar Chouhan

AmarKhabar.com एक हिन्दी न्यूज़ पोर्टल है, इस पोर्टल पर राजनैतिक, मनोरंजन, खेल-कूद, देश विदेश, एवं लोकल खबरों को प्रकाशित किया जाता है। छत्तीसगढ़ सहित आस पास की खबरों को पढ़ने के लिए हमारे न्यूज़ पोर्टल पर प्रतिदिन विजिट करें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button