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सारडा एनर्जी पर अवैध फ्लाई ऐश डंपिंग के गंभीर आरोप, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com

सरकारी ज़मीन पर राख का साम्राज्य

घरघोड़ा।तहसील क्षेत्र इन दिनों उद्योगों की मनमानी और प्रशासनिक ढिलाई का ऐसा उदाहरण बनता जा रहा है, जहाँ कानून कागज़ों में सीमित दिखता है और ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। ताज़ा मामला ग्राम नवापारा (पहन 18) का है, जहाँ खसरा क्रमांक 311/1 की शासकीय भूमि पर कथित तौर पर सारडा एनर्जी कंपनी द्वारा बड़े पैमाने पर अवैध फ्लाई ऐश डंपिंग किए जाने का मामला सामने आया है।

स्थानीय जनप्रतिनिधि द्वारा नायब तहसीलदार को सौंपे गए आवेदन ने इस पूरे खेल की परतें खोल दी हैं। आरोप है कि बिना किसी वैधानिक अनुमति के सरकारी जमीन को राख फेंकने का अड्डा बना दिया गया है। यह न केवल पर्यावरणीय नियमों की खुली अवहेलना है, बल्कि सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग का भी गंभीर मामला है।

राख के ढेर में दबता पर्यावरण और जनजीवन

फ्लाई ऐश, जो कि थर्मल प्लांट से निकलने वाला खतरनाक अपशिष्ट है, उसे वैज्ञानिक तरीके से निपटान की सख्त गाइडलाइन होती है। लेकिन नवापारा में जो स्थिति सामने आ रही है, वह इन नियमों की धज्जियां उड़ाती दिख रही है। खुले में डंप की जा रही राख से हवा और मिट्टी दोनों प्रदूषित हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि धूल के गुबार से सांस लेना मुश्किल हो गया है, खेती की जमीन की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और जल स्रोतों पर भी इसका असर पड़ने लगा है।



मिलीभगत के बिना संभव नहीं इतना बड़ा खेल

शिकायत में सबसे गंभीर आरोप यह है कि इस पूरे अवैध डंपिंग कार्य में केवल कंपनी ही नहीं, बल्कि ट्रांसपोर्टरों, कुछ राजस्व कर्मचारियों और पंचायत से जुड़े लोगों की संभावित मिलीभगत भी शामिल हो सकती है। आरोप है कि गलत जानकारी देकर उच्च अधिकारियों को गुमराह किया जा रहा है, जिससे यह अवैध गतिविधि निर्बाध रूप से जारी है।

यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल पर्यावरणीय अपराध नहीं बल्कि प्रशासनिक तंत्र की विश्वसनीयता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।

प्रशासन की परीक्षा की घड़ी

जनप्रतिनिधि ने स्पष्ट मांग की है कि शासकीय भूमि पर हो रही इस अवैध डंपिंग को तत्काल प्रभाव से रोका जाए, डंप की गई फ्लाई ऐश को हटाकर सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए और दोषियों के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाए।

साथ ही चेतावनी भी दी गई है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो क्षेत्र की जनता अपने स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होगी।

सवाल जो जवाब मांगते हैं

क्या सारडा एनर्जी को सरकारी जमीन पर डंपिंग की कोई अनुमति है?

यदि नहीं, तो इतने लंबे समय से यह कार्य कैसे जारी है?

क्या स्थानीय प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं थी, या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही थी?


घरघोड़ा का यह मामला केवल एक गांव या एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक समस्या की झलक है, जहाँ विकास के नाम पर नियमों को ताक पर रख दिया जाता है।

अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर कितनी तत्परता और निष्पक्षता से कार्रवाई करता है—या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा, और सरकारी जमीन पर राख का यह साम्राज्य यूँ ही फैलता रहेगा।

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Amar Chouhan

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