सामाजिक न्याय की ओर बढ़ते कदम: घरघोड़ा में विधिक जागरूकता शिविर ने खोले अधिकारों के नए रास्ते

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
घरघोड़ा। विश्व सामाजिक न्याय दिवस के अवसर पर न्याय तक आमजन की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में घरघोड़ा क्षेत्र में एक सार्थक पहल देखने को मिली। राष्ट्रीय स्तर पर जारी निर्देशों के अनुरूप जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायगढ़ के मार्गदर्शन तथा तालुका विधिक सेवा समिति घरघोड़ा के अध्यक्ष के परिपालन में एक व्यापक विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य केवल कानून की जानकारी देना नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय की अवधारणा को पहुंचाना रहा।
कार्यक्रम का संचालन पैरालीगल वॉलेंटियर्स बालकृष्ण, लवकुमार चौहान, टीकम सिदार और सुभाष चौधरी ने किया। उन्होंने सरल भाषा में उपस्थित नागरिकों को बताया कि कानून केवल अदालतों तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े अनेक मुद्दों में लोगों के अधिकारों की रक्षा करता है।
शिविर में विभिन्न विधिक योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी गई। निःशुल्क विधिक सहायता योजना के तहत पात्र व्यक्तियों को वकील, परामर्श और न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग उपलब्ध कराने की व्यवस्था समझाई गई। लोक अदालत और राष्ट्रीय लोक अदालत की उपयोगिता बताते हुए यह भी बताया गया कि इन मंचों के माध्यम से लंबित मामलों का त्वरित और सौहार्दपूर्ण समाधान संभव है। पीड़ित प्रतिकर योजना, महिला एवं बाल संरक्षण से जुड़ी व्यवस्थाएं, घरेलू हिंसा और दहेज प्रताड़ना के मामलों में सहायता जैसे विषयों पर विशेष चर्चा हुई।
बाल श्रम और बाल विवाह उन्मूलन से संबंधित कानूनी प्रावधानों को रेखांकित करते हुए आयोजकों ने कहा कि सामाजिक बुराइयों के खिलाफ कानून मजबूत है, जरूरत है जागरूकता और पहल की। वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार, श्रमिकों और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के संरक्षण, जेलों में बंद बंदियों को उपलब्ध विधिक सहायता तथा पैरोल और जमानत संबंधी प्रक्रियाओं की जानकारी भी दी गई। मानसिक और बौद्धिक दिव्यांग व्यक्तियों के लिए उपलब्ध विधिक सेवाओं तथा ट्रांसजेंडर और समाज के हाशिये पर स्थित वर्गों के लिए विशेष योजनाओं पर भी प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम के दौरान साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे को देखते हुए डिजिटल सतर्कता पर जोर दिया गया। भूमि विवाद, मोटर दुर्घटना दावा, पारिवारिक विवाद, भरण-पोषण, संपत्ति विवाद सहित अन्य नागरिक और आपराधिक मामलों में उपलब्ध कानूनी उपायों के बारे में व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया गया, जिससे लोगों को यह समझ आ सके कि समस्या आने पर किस दरवाजे पर दस्तक देनी है।
शिविर में उपस्थित नागरिकों को बताया गया कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग, महिलाएं, बच्चे, दिव्यांगजन, औद्योगिक श्रमिक, हिरासत में बंद व्यक्ति तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग निःशुल्क विधिक सहायता पाने के लिए पात्र हैं। यह जानकारी कई लोगों के लिए नई थी और इससे न्याय व्यवस्था के प्रति भरोसा बढ़ता नजर आया।
कार्यक्रम के समापन पर 14 मार्च को आयोजित होने वाली आगामी नेशनल लोक अदालत के व्यापक प्रचार-प्रसार का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि न्याय तभी सार्थक है जब वह सभी के लिए सुलभ हो। “न्याय सबके लिए, न्याय तक सबकी पहुंच” के संदेश के साथ सामाजिक न्याय, समानता और विधि के प्रति विश्वास को मजबूत करने की अपील की गई।
घरघोड़ा में आयोजित यह शिविर केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि अधिकारों की समझ और न्याय तक पहुंच की दिशा में जागरूकता का एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।