विकास की आड़ में दम घोंटता रायगढ़: शिव शक्ति प्लांट के धुएँ तले बंगुरसिया–हमीरपुर रोड की सिसकती ज़िंदगी

फ्रीलांस एडिटर अमरदीप चौहान/अमरखबर.कॉम रायगढ़।
काग़ज़ों में विकास की रफ्तार भले तेज़ दिखाई दे रही हो, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि रायगढ़ की हवा हर दिन और ज़्यादा ज़हरीली होती जा रही है। बंगुरसिया–हमीरपुर रोड पर स्थित शिव शक्ति प्लांट इसका जीता-जागता उदाहरण है, जहाँ से उठता धुआँ अब असामान्य नहीं, बल्कि रोज़मर्रा का “नज़ारा” बन चुका है। सुबह से लेकर देर रात तक आसमान में पसरा धुएँ का गुबार इस बात की गवाही देता है कि यहां नियमों से ज़्यादा ताक़त का बोलबाला है।
स्थानीय लोग बताते हैं कि यह हाल कोई एक-दो दिन का नहीं, बल्कि सालों से जारी है। बावजूद इसके न तो प्रदूषण नियंत्रण विभाग की सक्रियता दिखाई देती है और न ही किसी ठोस कार्रवाई की खबर सामने आती है। आम धारणा बन चुकी है कि शायद इस प्लांट को प्रदूषण फैलाने की “मौन अनुमति” मिल चुकी है, तभी तो खुलेआम नियमों की धज्जियाँ उड़ रही हैं।
विडंबना यह है कि प्रशासन की सख़्ती आम आदमी तक सीमित नज़र आती है। अगर किसी नागरिक की बाइक या कार का प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) नहीं है, तो तुरंत चालान काटा जाता है, जुर्माना वसूला जाता है और कार्रवाई की मिसाल पेश की जाती है। लेकिन जब सवाल बड़े उद्योगों का आता है, तो वही नियम जैसे ठिठक जाते हैं। शिव शक्ति प्लांट से निकलने वाला धुआँ न सिर्फ़ पर्यावरण मानकों का मज़ाक उड़ाता दिखता है, बल्कि आसपास के रहवासी इलाकों के स्वास्थ्य पर भी सीधा असर डाल रहा है।

बगुरसिया, हमीरपुर रोड और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों की शिकायत है कि सांस लेना मुश्किल होता जा रहा है। बच्चों में खांसी, बुजुर्गों में सांस की तकलीफ और आंखों में जलन अब आम बात हो चुकी है। खेतों और पेड़ों पर जमी कालिख इस बात का सबूत है कि प्रदूषण सिर्फ़ हवा तक सीमित नहीं, बल्कि ज़मीन और जीवन दोनों को नुकसान पहुँचा रहा है।
सवाल यह है कि क्या विकास का यही मतलब है—कि कुछ उद्योग मुनाफ़े के नाम पर पूरे इलाके को गैस चैंबर में बदल दें? क्या पर्यावरण विभाग की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ काग़ज़ी नोटिस और औपचारिक निरीक्षण तक सीमित रह गई है? अगर नियम सबके लिए समान हैं, तो फिर कार्रवाई में यह दोहरा मापदंड क्यों?

रायगढ़ पहले ही प्रदूषण के नक्शे पर चिंताजनक स्थिति में खड़ा है। ऐसे में शिव शक्ति प्लांट जैसे मामलों पर चुप्पी न सिर्फ़ प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि आम जनता के जीवन के अधिकार पर भी सीधा प्रहार करती है। अब ज़रूरत है कि जिम्मेदार विभाग ज़मीन पर उतरें, निष्पक्ष जांच करें और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख़्त कार्रवाई करें—वरना विकास के नाम पर बदनाम होता रायगढ़ सिर्फ़ आंकड़ों में नहीं, बल्कि सांसों में भी टूटता चला जाएगा।
समाचार सहयोगी पद्मनाभ प्रधान