वनांचल में स्वास्थ्य शिक्षा का नया सवेरा: एएनएम कॉलेज से बदलेगी बेटियों की तकदीर

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़, 13 फरवरी 2026।
रायगढ़ जिले के सुदूर वनांचल में बसा लैलूंगा विकासखंड अक्सर अपनी भौगोलिक दूरी के कारण चर्चा में रहा है, लेकिन अब यह क्षेत्र एक नई वजह से पहचाना जाएगा—यहां की बेटियों के सपनों को पंख देने वाली ऐतिहासिक पहल के कारण। ग्राम कुंजरा में एएनएम नर्सिंग महाविद्यालय की स्थापना की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है, जो केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का सूत्रपात है।
दूरदृष्टि से धरातल तक
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के वनांचल प्रवासों के दौरान स्थानीय अभिभावकों और छात्राओं ने जिस मांग को बार-बार दोहराया, वह अब आकार ले रही है। एएनएम महाविद्यालय की स्थापना को लेकर दिए गए निर्देशों पर जिला प्रशासन ने तत्परता दिखाई है। यह पहल इस बात का प्रमाण है कि जब जनभावना और शासन की इच्छा एक दिशा में हों, तो निर्णय फाइलों में नहीं अटकते।
लैलूंगा और धरमजयगढ़ जैसे दुर्गम अंचलों की बेटियां अब व्यावसायिक शिक्षा के लिए शहरों की ओर पलायन को मजबूर नहीं होंगी। संसाधनों की कमी, दूरी और आर्थिक बाधाएं अक्सर उनकी राह रोक देती थीं। कुंजरा में प्रस्तावित महाविद्यालय इन बाधाओं को कम करने की दिशा में ठोस कदम है।
120 सीटें, शत-प्रतिशत रोजगार का भरोसा
प्रथम शैक्षणिक सत्र से ही 120 छात्राओं को प्रवेश दिया जाएगा। चयन प्रक्रिया में आदिवासी क्षेत्रों की गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाली 12वीं उत्तीर्ण प्रतिभाशाली बेटियों को प्राथमिकता दी जाएगी। दो वर्षीय पाठ्यक्रम पूर्ण होने के बाद नियोजन प्रक्रिया के माध्यम से शत-प्रतिशत रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था इस पहल को विशिष्ट बनाती है।

प्रशिक्षण इस प्रकार तैयार किया जा रहा है कि छात्राएं राष्ट्रीय स्तर के चिकित्सा संस्थानों में सेवाएं देने के योग्य बन सकें। भविष्य में वे All India Institute of Medical Sciences (एम्स), चिकित्सा महाविद्यालयों और जिला अस्पतालों में कार्य करने का अवसर पा सकेंगी। राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के द्वार भी उनके लिए खुले रहेंगे।
गुणवत्ता की जिम्मेदारी, प्रतिष्ठित संस्था के हाथों
महाविद्यालय का संचालन PanIIT Alumni Foundation द्वारा किया जाएगा, जो देशभर में शिक्षा और सामाजिक पहलों के लिए जानी जाती है। आधुनिक प्रयोगशालाएं, समृद्ध पुस्तकालय, अद्यतन पाठ्यसामग्री और व्यावहारिक प्रशिक्षण पर विशेष बल—इन सबके माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी।
शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने से पहले उपलब्ध शासकीय भवन का जीर्णोद्धार और आवश्यक अधोसंरचना निर्माण जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) से कराया जाएगा। इससे सीमित समय में ही संचालन योग्य परिसर तैयार हो सकेगा।
वनांचल की बदलती तस्वीर
यह पहल केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है; यह आत्मविश्वास का विस्तार है। जब किसी आदिवासी अंचल की बेटी अपने ही गांव-क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण नर्सिंग शिक्षा प्राप्त करेगी, तो उसका आत्मबल बढ़ेगा और परिवारों की सोच में भी परिवर्तन आएगा।
वनांचल के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की दृष्टि से भी यह कदम महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षित स्थानीय नर्सें न केवल रोजगार पाएंगी, बल्कि अपने ही क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने में भूमिका निभाएंगी।
कुंजरा का यह प्रस्तावित एएनएम महाविद्यालय आने वाले वर्षों में एक मिसाल बन सकता है—जहां शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सशक्तिकरण एक साथ कदम बढ़ाते नजर आएंगे।
वनांचल की बेटियों के लिए यह सचमुच नई उड़ान का क्षण है—ऐसी उड़ान, जो उन्हें आत्मनिर्भरता और सम्मान की ऊंचाइयों तक ले जाएगी।