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लकड़ी बीनने जंगल गया था बुजुर्ग, हाथी ने ले ली जान
छाल रेंज के चुहकीमार जंगल में मानव–हाथी संघर्ष का दर्दनाक चेहरा

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com

रायगढ़।
रायगढ़ जिले में मानव और हाथियों के बीच बढ़ता टकराव एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ। रविवार दोपहर छाल रेंज के चुहकीमार जंगल में जंगली हाथी के हमले से एक बुजुर्ग ग्रामीण की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और ग्रामीणों में भय के साथ-साथ आक्रोश भी देखा जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक, धमरजयगढ़ वनमंडल अंतर्गत छाल रेंज के ग्राम चुहकीमार निवासी 70 वर्षीय गंगाराम सारथी रोज़ की तरह सुबह करीब 10 बजे जंगल में लकड़ी लेने गया था। दोपहर लगभग ढाई बजे जंगल के भीतर उसका अचानक एक हाथी से सामना हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हाथी ने बिना चेतावनी हमला कर दिया और बुजुर्ग को कुचल दिया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और हाथी मित्र दल की टीम मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की गई। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल चुहकीमार और आसपास के जंगलों में करीब 12 हाथियों का एक दल विचरण कर रहा है, जिसके चलते क्षेत्र को संवेदनशील घोषित किया गया है।

जिले में 101 हाथियों की मौजूदगी, बढ़ती चुनौती

वन विभाग के अनुसार इन दिनों रायगढ़ जिले में कुल 101 हाथी अलग-अलग दलों में सक्रिय हैं। इनमें रायगढ़ वनमंडल में 59 और धमरजयगढ़ वनमंडल में 42 हाथी विचरण कर रहे हैं। इस आबादी में 32 नर, 48 मादा और 21 शावक शामिल हैं। हाथियों की लगातार आवाजाही के कारण ग्रामीण इलाकों में खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

एक रात में पांच मकान ध्वस्त

मानव–हाथी संघर्ष की तस्वीर सिर्फ चुहकीमार तक सीमित नहीं है। बीती रात एक दंतैल हाथी ने लैलूंगा रेंज के आमापाली बीट अंतर्गत टोंगोटोला, झारआमा, पाकरगांव और सागरपाली गांव में पांच ग्रामीणों के मकानों को तोड़ दिया। इसके अलावा प्रेमनगर में फसलों को नुकसान पहुंचाया गया, चुहकीमार में सब्जी की खेती रौंदी गई और कुड़ेकेला क्षेत्र में पाइपलाइन क्षतिग्रस्त की गई।

नुकसान की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में पहुंचीं और क्षति का आकलन शुरू किया। विभाग की ओर से मुआवजा प्रक्रिया की बात कही जा रही है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों की बढ़ती आवाजाही पर ठोस नियंत्रण और स्थायी समाधान की जरूरत है।

भय के साए में ग्रामीण

लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में भय व्याप्त है। लोग जंगल जाने से कतरा रहे हैं, जबकि कई गांव सीधे हाथियों के मूवमेंट रूट पर बसे हुए हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जाए, अलर्ट सिस्टम मजबूत किया जाए और हाथियों को आबादी से दूर रखने के लिए ठोस रणनीति बनाई जाए।

चुहकीमार की यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन बना पाने में सिस्टम नाकाम हो रहा है? जवाब तलाशना अब वन विभाग और प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बन चुकी है।

Amar Chouhan

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