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रूपाणाधाम स्टील हादसा: श्रमिक की मौत के बाद सियासत गरम, युवा कांग्रेस ने खोला मोर्चा—FIR और गिरफ्तारी की मांग तेज

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com

रायगढ़। औद्योगिक विकास की चमक के पीछे छिपी लापरवाही एक बार फिर एक परिवार पर भारी पड़ गई। पूंजीपथरा थाना क्षेत्र के गडगांव–सरायपाली स्थित रूपाणाधाम स्टील प्लांट में हुए हादसे ने न सिर्फ एक श्रमिक की जान ले ली, बल्कि श्रमिक सुरक्षा को लेकर पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। अब इस घटना ने सियासी रंग भी ले लिया है, जहां युवा कांग्रेस खुलकर मैदान में उतर आई है।

घटना 08 अप्रैल 2026 की बताई जा रही है, जब प्लांट में कार्यरत श्रमिक दीपक चौहान बायलर एवं ऊंचाई से जुड़े काम के दौरान अचानक नीचे गिर पड़े। हादसा इतना गंभीर था कि उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। परिजनों के साथ-साथ सहकर्मियों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए 09 अप्रैल को युवा कांग्रेस ने पहली बार थाना पूंजीपथरा में दस्तक दी। संगठन के जिला अध्यक्ष उस्मान बेग ने लिखित आवेदन सौंपते हुए प्लांट प्रबंधन पर सीधे-सीधे लापरवाही के आरोप लगाए। उनका कहना था कि श्रमिकों को न तो पर्याप्त सुरक्षा उपकरण दिए जाते हैं और न ही कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाता है।

श्रमिक की मौत के बाद अब यह मामला और तूल पकड़ता नजर आ रहा है। युवा कांग्रेस ने एक बार फिर पूरक आवेदन देकर भारतीय न्याय संहिता की धाराएं जोड़ते हुए प्लांट मालिक और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग तेज कर दी है। संगठन ने पुलिस अधीक्षक रायगढ़ को भी ज्ञापन भेजकर अब तक कार्रवाई नहीं होने पर नाराजगी जताई है।

ज्ञापन में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि घटना स्थल के CCTV फुटेज तत्काल जब्त किए जाएं, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग से संयुक्त तकनीकी जांच कराई जाए, और दोषी पाए जाने पर प्लांट प्रबंधन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो। साथ ही मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को रोजगार देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है।

यु.काँ. जिला अध्यक्ष उस्मान बेग ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि जल्द ही FIR दर्ज कर गिरफ्तारी नहीं की गई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। उनका कहना है कि “08 अप्रैल को हादसा हुआ, 09 अप्रैल को हमने पहला आवेदन दिया, और अब मौत के बाद दूसरा आवेदन भी दे चुके हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने गंभीर हादसे के बाद भी यदि त्वरित कार्रवाई नहीं होती, तो यह प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है।

रूपाणाधाम स्टील प्लांट का यह हादसा कोई अकेली घटना नहीं है। औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और निगरानी की कमी लंबे समय से चिंता का विषय रही है। लेकिन हर बार हादसे के बाद कुछ दिनों की हलचल के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि इस बार प्रशासन और पुलिस कितनी गंभीरता दिखाते हैं—क्या दोषियों तक कानून का शिकंजा पहुंचेगा, या फिर एक और श्रमिक की मौत आंकड़ों में सिमटकर रह जाएगी।

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Amar Chouhan

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