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रायगढ़ में बेटियों की सेहत पर बड़ा निवेश: 1583 छात्राओं को लगेगा एचपीवी टीका, सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए 26.60 लाख स्वीकृत

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com

रायगढ़, 11 मार्च 2026।
जिले की छात्राओं के स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल की है। रायगढ़ जिले के शासकीय आश्रमों और छात्रावासों में रहने वाली 9 से 14 वर्ष आयु वर्ग की 1583 बालिकाओं को सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए निःशुल्क ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) वैक्सीन लगाई जाएगी। इस अभियान के लिए कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से 26 लाख 60 हजार 400 रुपये की राशि को मंजूरी दी है।

यह पहल खासतौर पर उन छात्राओं के लिए राहतभरी है, जो जिले के दूरस्थ और आदिवासी अंचलों से आकर शासकीय आश्रमों और छात्रावासों में रहकर पढ़ाई कर रही हैं। प्रशासन का मानना है कि कम उम्र में इस टीकाकरण से भविष्य में होने वाले एक गंभीर और जानलेवा रोग से बचाव संभव है।

दूरस्थ अंचलों की छात्राओं को मिलेगा लाभ

योजना के तहत उदयपुर–धरमजयगढ़, घरघोड़ा, खरसिया, तमनार, कापू और लैलूंगा विकासखंड के आश्रमों और छात्रावासों में रहने वाली छात्राओं का टीकाकरण किया जाएगा। इन क्षेत्रों की 31 से अधिक ग्राम पंचायतों से आने वाली कुल 1583 बालिकाएं इस स्वास्थ्य अभियान का हिस्सा बनेंगी।

इन छात्राओं में बड़ी संख्या आदिवासी समुदाय की है, जो शिक्षा के लिए अपने गांवों से दूर रहकर पढ़ाई कर रही हैं। ऐसे में जिला प्रशासन ने उनके स्वास्थ्य संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए यह कदम उठाया है।

सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ प्रभावी सुरक्षा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं में होने वाले सर्वाइकल कैंसर के लगभग 99 प्रतिशत मामलों का कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) होता है। यदि कम उम्र में एचपीवी वैक्सीन लगा दी जाए तो इस गंभीर बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

योजना के तहत प्रति छात्रा लगभग 1800 रुपये की लागत से टीकाकरण किया जाएगा, जिसका पूरा खर्च शासन द्वारा वहन किया जाएगा।

दो चरणों में लगेगी वैक्सीन

टीकाकरण अभियान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के मार्गदर्शन में प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा संचालित किया जाएगा। प्रत्येक छात्रा को वैक्सीन की दो खुराक दी जाएगी।

पहली खुराक प्रारंभिक चरण में लगाई जाएगी।

दूसरी खुराक छह माह बाद दी जाएगी, ताकि टीकाकरण का पूरा प्रभाव मिल सके।


स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में अहम पहल

जिला प्रशासन का मानना है कि यह अभियान केवल एक टीकाकरण कार्यक्रम नहीं, बल्कि बालिकाओं के सुरक्षित भविष्य की दिशा में एक मजबूत कदम है। दूरस्थ अंचलों की छात्राओं को इस गंभीर बीमारी से बचाने के साथ-साथ उन्हें स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने का भी प्रयास किया जाएगा।

विशेषज्ञों के मुताबिक यदि इस तरह के अभियान नियमित रूप से चलाए जाएं तो आने वाले वर्षों में महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के मामलों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। रायगढ़ जिले की यह पहल इसी दिशा में एक सकारात्मक और सराहनीय प्रयास मानी जा रही है।

Amar Chouhan

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