रायगढ़ में ‘ड्रिंक एंड ड्राइव’ का कहर: अडानी गेट के सामने युवक की मौत, आंकड़े दे रहे बड़े खतरे का संकेत

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में सड़कों पर लापरवाही और नशे की आदत एक बार फिर जानलेवा साबित हुई। शनिवार की शाम पुसौर थाना क्षेत्र में एक तेज रफ्तार बाइक सवार युवक की ट्रक के पहियों तले आकर मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि जिले में लगातार बढ़ते “ड्रिंक एंड ड्राइव” के खतरनाक ट्रेंड की एक और कड़ी बन गई है।
मिली जानकारी के अनुसार, दनौट निवासी सहानु राठिया शनिवार शाम करीब 5 बजे अपने पड़ोसी की मोटरसाइकिल लेकर चंद्रपुर की ओर निकला था। बड़े भंडार के पास अडानी कंपनी के कोयला गेट के सामने ओवरटेक के दौरान वह संतुलन खो बैठा और सीधे ट्रक के पहियों के नीचे जा घुसा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, टक्कर इतनी भीषण थी कि युवक को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
स्थानीय लोगों का कहना है कि युवक नशे में था और परिजनों ने उसे घर से निकलने से रोका भी था, लेकिन उसने किसी की नहीं सुनी। यही लापरवाही उसकी जिंदगी पर भारी पड़ गई।
घटना की सूचना मिलते ही पुसौर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजते हुए मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।
बढ़ता खतरा: आंकड़े क्या कहते हैं?
रायगढ़ जिले में बीते कुछ वर्षों में सड़क हादसों का ग्राफ चिंताजनक ढंग से बढ़ा है, जिसमें “ड्रिंक एंड ड्राइव” एक प्रमुख कारण बनकर उभरा है।
पुलिस और परिवहन विभाग के अनुमानित आंकड़ों के अनुसार,
हर साल जिले में 250–300 सड़क हादसे दर्ज होते हैं।
इनमें से 20–30% मामलों में शराब के सेवन की पुष्टि या आशंका सामने आती है।
खास बात यह है कि शाम 5 बजे से रात 10 बजे के बीच होने वाले हादसों में नशे की भूमिका सबसे ज्यादा पाई जाती है।
ग्रामीण और औद्योगिक क्षेत्रों—जैसे पुसौर, तमनार, घरघोड़ा बेल्ट—में यह समस्या और गंभीर है, जहां भारी वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है।
औद्योगिक क्षेत्र और जोखिम का समीकरण
रायगढ़ का पुसौर-तमनार इलाका अब महज गांव नहीं रहा, बल्कि बड़े औद्योगिक कॉरिडोर में बदल चुका है। अडानी जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के कारण सड़कों पर दिन-रात भारी ट्रकों की आवाजाही रहती है। ऐसे में:
संकरी सड़कें
तेज रफ्तार भारी वाहन
और नशे में दोपहिया चालक
ये तीनों मिलकर “खतरनाक त्रिकोण” बना रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ओवरटेकिंग के दौरान संतुलन बिगड़ना और सामने भारी वाहन होना, मौत की संभावना को कई गुना बढ़ा देता है—जैसा इस मामले में हुआ।
कानून सख्त, लेकिन अमल ढीला
हालांकि “ड्रिंक एंड ड्राइव” के खिलाफ कानून सख्त हैं—जुर्माना, लाइसेंस निलंबन और जेल तक का प्रावधान है—लेकिन जमीनी स्तर पर इनका पालन अब भी चुनौती बना हुआ है।
ग्रामीण इलाकों में नियमित चेकिंग का अभाव
शराब दुकानों के आसपास निगरानी की कमी
और लोगों में जागरूकता की कमी
इन हादसों को बढ़ावा दे रहे हैं।
एक सवाल, जो हर हादसे के बाद रह जाता है
सहानु राठिया की मौत के बाद उसके घर में मातम पसरा है, लेकिन सवाल वही है—क्या यह टाला नहीं जा सकता था?
परिजनों ने रोका, फिर भी वह निकला। नशे में था, फिर भी वाहन चलाया। सड़क पर भारी ट्रक था, फिर भी ओवरटेक की कोशिश की।
इन तीन गलतियों ने मिलकर एक जिंदगी खत्म कर दी।
रायगढ़ में “ड्रिंक एंड ड्राइव” अब सिर्फ कानून का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना की परीक्षा बन चुका है। जब तक लोग खुद जिम्मेदारी नहीं लेंगे, तब तक ऐसे हादसे खबर बनते रहेंगे—और घर उजड़ते रहेंगे।
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