Latest News

रायगढ़ में जमीन, उद्योग और कानून का टकराव: मुआवजे के विरोध से गिरफ्तारी तक, थाने के बाहर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com

रायगढ़, 21 मार्च 2026।
जिले में औद्योगिक परियोजनाओं और ग्रामीणों के अधिकारों के बीच चल रहा तनाव अब खुलकर सतह पर आ गया है। खरसिया विधानसभा क्षेत्र के ग्राम गेजामुड़ा से जुड़ा एक मामला शनिवार को उस वक्त तूल पकड़ गया, जब कथित तौर पर मुआवजे में गड़बड़ी के विरोध में आवाज उठाने वाले एक ग्रामीण को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इसके बाद परिजनों और ग्रामीणों ने कोतरा रोड थाने के सामने धरना शुरू कर दिया, जो देर शाम तक जारी रहा।

बताया जा रहा है कि अडानी समूह की रेल लाइन परियोजना से प्रभावित करीब 28 किसानों ने अपनी जमीन खोई है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिला। इसी मुद्दे को लेकर गांव के युवक ऋषि पटेल लगातार आवाज उठा रहे थे। परिजनों के अनुसार, शनिवार दोपहर उन्हें जेएसपीएल (जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड) प्लांट में किसी काम के बहाने बुलाया गया, जहां से पुलिस उन्हें अपने साथ ले गई।

शाम होते-होते जब ऋषि का कोई पता नहीं चला, तो परिजन और ग्रामीण बड़ी संख्या में कोतरा रोड थाने पहुंच गए। वहां महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों सहित पूरा परिवार धरने पर बैठ गया। परिजनों का आरोप है कि उन्हें न तो गिरफ्तारी की स्पष्ट जानकारी दी गई और न ही कोई आधिकारिक कारण बताया गया।

धरना स्थल पर मौजूद एक बुजुर्ग महिला ने कहा, “हमारा बेटा गलत नहीं है, बस अपने हक की बात कर रहा था। अगर आवाज उठाना अपराध है, तो हम सबको भी जेल में डाल दो।” वहीं, ऋषि के भाई ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई आगामी संभावित आंदोलन को दबाने के उद्देश्य से की गई है।

इसी बीच, इलाके में पहले से चल रहे रेल लाइन विवाद ने भी माहौल को और संवेदनशील बना दिया है। दूसरी ओर, इसी घटनाक्रम से जुड़े विरोध प्रदर्शन में कुछ ग्रामीणों ने नारेबाजी करते हुए पुलिस के खिलाफ आक्रोश जताया। प्रदर्शनकारियों ने यहां तक चेतावनी दी कि यदि उनके व्यक्ति को जल्द रिहा नहीं किया गया, तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए थाने के बाहर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। देर रात तक प्रशासन और ग्रामीणों के बीच बातचीत का दौर जारी रहा, हालांकि किसी ठोस समाधान की जानकारी सामने नहीं आई।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि औद्योगिक विकास और स्थानीय लोगों के अधिकारों के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाए। एक तरफ बड़े निवेश और परियोजनाएं हैं, तो दूसरी तरफ वे लोग हैं जिनकी जमीन और आजीविका दांव पर लगी है।

फिलहाल, रायगढ़ में हालात संवेदनशील बने हुए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस मामले को कैसे सुलझाता है—संवाद के जरिए या सख्ती के रास्ते।

अन्य अधिक खबरों के लिए क्लिक करें https://amarkhabar.com/

Amar Chouhan

AmarKhabar.com एक हिन्दी न्यूज़ पोर्टल है, इस पोर्टल पर राजनैतिक, मनोरंजन, खेल-कूद, देश विदेश, एवं लोकल खबरों को प्रकाशित किया जाता है। छत्तीसगढ़ सहित आस पास की खबरों को पढ़ने के लिए हमारे न्यूज़ पोर्टल पर प्रतिदिन विजिट करें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button