“मौत के बाद भी मिला सहारा: तमनार के एक परिवार के लिए जीवन बीमा बना संबल”

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़। अक्सर बीमा को लोग एक औपचारिक निवेश या अतिरिक्त खर्च मानकर टाल देते हैं, लेकिन तमनार क्षेत्र के एक साधारण परिवार की कहानी यह साबित करती है कि सही समय पर लिया गया फैसला कैसे मुश्किल घड़ी में जीवनरेखा बन जाता है।
तमनार (डोलेसरा) निवासी स्वर्गीय धरम सिंह तिग्गा ने कुछ समय पहले श्रीराम लाइफ इंश्योरेंस कंपनी, खरसिया शाखा के माध्यम से एक बीमा पॉलिसी ली थी। यह बीमा उनके परिचित प्रतिनिधि सुनील कुमार एक्का (रत्ना मिंज) के जरिए कराया गया था, जिसमें उन्होंने सालाना 54,507 रुपये का प्रीमियम जमा किया।
जीवन की अनिश्चितता को कोई नहीं टाल सकता, और दुर्भाग्यवश धरम सिंह तिग्गा का निधन हो गया। लेकिन इस कठिन समय में उनके द्वारा लिया गया बीमा उनके परिवार के लिए एक मजबूत आर्थिक सहारा बनकर सामने आया।
कंपनी के डिविजनल मैनेजर कमलेश पाण्डेय की देखरेख में बीमा प्रक्रिया पूरी की गई और मृतक की पत्नी व नामांकित लाभार्थी पुष्पा तिग्गा के खाते में सीधे 9,21,387 रुपये की राशि स्थानांतरित की गई।
यह सिर्फ एक भुगतान नहीं था, बल्कि उस परिवार के लिए संकट की घड़ी में एक नई शुरुआत का आधार भी बना।
स्थानीय स्तर पर इस मामले को एक उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है, जहां बीमा कंपनी ने समयबद्ध तरीके से अपनी जिम्मेदारी निभाई और एक ग्रामीण परिवार को आर्थिक असुरक्षा के गर्त में जाने से बचाया।
एक सीख जो नजरअंदाज नहीं की जा सकती
ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बीमा को लेकर जागरूकता की कमी है। लोग इसे अनावश्यक खर्च मानते हैं, जबकि हकीकत यह है कि यही छोटी-छोटी किस्तें भविष्य की बड़ी सुरक्षा बनती हैं।
धरम सिंह तिग्गा का मामला यह स्पष्ट करता है कि—
बीमा केवल कागज़ का दस्तावेज नहीं, बल्कि परिवार के भविष्य की गारंटी है।
ऐसे समय में जब अनिश्चितताएं बढ़ रही हैं, यह जरूरी है कि हर परिवार अपनी आर्थिक सुरक्षा को प्राथमिकता दे, ताकि किसी अनहोनी के बाद अपनों को सहारे के लिए दर-दर न भटकना पड़े।
News associate Kamlesh pandey