बेटियों के भविष्य की नई इबारत: रायगढ़ में उद्योग-प्रशासन की साझेदारी से ‘नव गुरुकुल’ को स्थायी संबल

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़, 13 फरवरी 2026।
रायगढ़ की फिजाओं में इन दिनों एक नई उम्मीद तैर रही है। यह उम्मीद है उन बेटियों की, जिनके सपनों को अब स्थायित्व का संबल मिला है। जिले के गढ़उमरीया स्थित नव गुरुकुल के संचालन को लेकर उद्योग जगत और जिला प्रशासन के बीच हुआ ताजा समझौता केवल एक औपचारिक एमओयू नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व और प्रशासनिक प्रतिबद्धता का जीवंत उदाहरण है।
रायगढ़ स्पंज आयरन मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन और सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग के बीच हुए इस समझौते ने स्पष्ट कर दिया है कि जब शासन की मंशा, प्रशासन की सक्रियता और उद्योग जगत की संवेदनशीलता एक दिशा में चल पड़ें, तो परिवर्तन की राह लंबी नहीं रहती।
प्रशासनिक नेतृत्व, सामाजिक प्रतिबद्धता
कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के निर्देश पर आयोजित इस कार्यक्रम में अपर कलेक्टर श्री अपूर्व टोप्पो की उपस्थिति ने इसे औपचारिकता से आगे बढ़ाकर गंभीरता का स्वर दिया। उन्होंने इसे जिले के सामाजिक और शैक्षणिक परिदृश्य में दूरगामी प्रभाव डालने वाली पहल बताया।
दरअसल, रायगढ़ लंबे समय से औद्योगिक गतिविधियों के लिए पहचाना जाता रहा है। अब वही उद्योग सामाजिक उत्तरदायित्व की भूमिका में सामने आए हैं। कार्यक्रम में रायगढ़ इस्पात एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड, माँ काली एलायंज, शाकंभरी स्टील लिमिटेड, नवदुर्गा फ्यूल्स और बी.एस. स्पंज सहित कई प्रमुख संस्थानों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि यह पहल केवल एक संस्था तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि व्यापक सहयोग की शुरुआत है।
160 बेटियों के सपनों को संबल
गढ़उमरीया स्थित नव गुरुकुल परिसर में वर्तमान में लगभग 160 बालिकाएं आवासीय सुविधा के साथ प्रशिक्षण ले रही हैं। यहां उन्हें निःशुल्क तकनीकी, व्यावसायिक और रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। यह प्रशिक्षण केवल प्रमाणपत्र तक सीमित नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम है।
समझौते के अंतर्गत संस्थान के संचालन से जुड़े बिजली बिल, साफ-सफाई, इंटरनेट, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य आवश्यक खर्चों का वहन अब रायगढ़ स्पंज आयरन मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन करेगा। इसका सीधा अर्थ है—प्रशिक्षण व्यवस्था अब आर्थिक अस्थिरता के दबाव से मुक्त होकर नियमित और सुव्यवस्थित ढंग से संचालित हो सकेगी।
उद्योग और शासन की साझा दृष्टि
उद्योग प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और वित्तमंत्री श्री ओपी चौधरी के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षा और सामाजिक उत्थान को नई प्राथमिकता मिली है। रायगढ़ में यह समझौता उसी नीति का स्थानीय प्रतिरूप है।
यह पहल उस सोच को भी मजबूत करती है कि औद्योगिक विकास और सामाजिक विकास परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हो सकते हैं। जब उद्योग अपने मुनाफे से आगे बढ़कर समाज के भविष्य में निवेश करता है, तो उसका लाभ पीढ़ियों तक दिखाई देता है।
मील का पत्थर बनने की दिशा में
रायगढ़ की बेटियों के लिए यह समझौता केवल सुविधा विस्तार नहीं, बल्कि आत्मविश्वास का विस्तार है। अब उन्हें यह भरोसा मिलेगा कि उनके कौशल विकास की राह में संसाधनों की कमी बाधा नहीं बनेगी।
आने वाले वर्षों में यदि इन प्रशिक्षित बालिकाओं में से कोई उद्यमी बने, कोई तकनीशियन, कोई प्रशिक्षक या कोई प्रशासनिक पद तक पहुंचे—तो इसकी नींव आज के इस निर्णय में तलाशनी होगी।
रायगढ़ की धरती पर उद्योगों की चिमनियों से उठता धुआं अब केवल उत्पादन का प्रतीक नहीं रहेगा; वह उन सपनों की उड़ान का भी संकेत होगा, जिन्हें नव गुरुकुल ने दिशा दी है।
यह समझौता सचमुच एक दस्तावेज से कहीं अधिक है—यह जिले की बेटियों के भविष्य पर लिखी जा रही नई इबारत है।