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बायसी ग्रामसभा का ऐतिहासिक फैसला: 1610 हेक्टेयर कोल ब्लॉक प्रस्ताव को सर्वसम्मति से खारिज, जंगल–जल–जमीन की रक्षा को प्राथमिकता

फ्रीलांस एडिटर अमरदीप चौहान/अमरखबर.कॉम बायसी (धरमजयगढ़)।
धरमजयगढ़ क्षेत्र में जनसरोकारों और संवैधानिक अधिकारों को केंद्र में रखते हुए ग्राम पंचायत बायसी की ग्रामसभा ने 1 दिसंबर 2025 को एक ऐतिहासिक निर्णय लिया। ग्रामसभा ने पाँचवीं अनुसूची तथा छत्तीसगढ़ पेसा अधिनियम 2022 में निहित अधिकारों का प्रयोग करते हुए कर्नाटक पॉवर लिमिटेड के 1610 हेक्टेयर के प्रस्तावित ओपन कोल ब्लॉक को पूर्णतः अस्वीकार कर दिया। यह फैसला न सिर्फ स्थानीय जनभावनाओं की अभिव्यक्ति है बल्कि आदिवासी परंपराओं, प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समुदाय के दृढ़ संकल्प का प्रमाण भी है।



प्रभावित क्षेत्र विशाल — 1070 हेक्टेयर पर सीधा खतरा

ग्रामसभा में प्रस्तुत तथ्य बताते हैं कि प्रस्तावित खनन क्षेत्र में 1070 हेक्टेयर भूमि सीधे बायसी और आसपास के ग्रामीण इलाकों को प्रभावित करती है।
महत्त्वपूर्ण यह कि इसमें 365.056 हेक्टेयर वनभूमि शामिल है, जो वर्षों से हाथियों के प्राकृतिक कॉरिडोर के रूप में चिन्हित है।

वन विभाग के आंकड़े गंभीर तस्वीर पेश करते हैं—

2001 से अब तक 59 ग्रामीणों की मौत हाथी हमले में हुई,

वहीं 23 हाथियों की मौत भी विभिन्न कारणों से दर्ज है।


ग्रामसभा का मत था कि खनन शुरू होते ही जंगल की कटाई बढ़ेगी और मानव–वन्यजीव संघर्ष खतरनाक स्तर पर पहुँच सकता है। इसलिए क्षेत्र को संरक्षित रखना ही एकमात्र व्यावहारिक विकल्प है।



आदिवासी देवस्थानों और सांस्कृतिक विरासत पर अस्तित्वगत संकट

ग्रामसभा ने बताया कि प्रस्तावित क्षेत्र में आदिवासियों के
पुरखा देव, बूढ़ी माता, ठाकुर देव, दुल्हा देव, खूंट गौरैया, पीठा पाठ
जैसे प्राचीन देवस्थानों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। ग्रामीणों के अनुसार यह सिर्फ पूजा स्थलों का सवाल नहीं है, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान और इतिहास की रक्षा का मुद्दा है।

कृषि अर्थव्यवस्था पर गहरा असर—लाखों की वार्षिक आय दांव पर

क्षेत्र के किसान धान, मक्का, तरबूज सहित कई फसलों से प्रतिवर्ष 8–10 लाख रुपये तक की पारिवारिक आय अर्जित करते हैं।
ग्रामसभा ने स्पष्ट कहा कि खनन शुरू होते ही—

खेतों की उर्वरा क्षमता घटेगी,

जलस्रोत प्रदूषित होंगे,

सिंचाई व्यवस्था बाधित होगी,

और कृषि लगभग खत्म हो जाएगी।


यह स्थानीय अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रहार माना गया।



भूमि अधिग्रहण चिह्नांकन हटाने का निर्देश

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई किसानों की जमीन पर पटवारी द्वारा भू-अर्जन चिह्नांकन कर दिया गया है, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में बाधा आ रही है।
ग्रामसभा के प्रस्ताव में अनुविभागीय अधिकारी धरमजयगढ़ को चिह्नांकन तत्काल हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं।



ग्रामसभा का अंतिम निर्णय—कोल ब्लॉक ‘पूरी तरह अवैध’

बैठक के अंतिम प्रस्ताव में ग्रामसभा ने घोषणा की कि ग्रामसभा की स्पष्ट असहमति के बाद—

किसी भी प्रकार का खनन,

सर्वेक्षण,

सार्वजनिक सुनवाई,

भूमि अधिग्रहण


अवैध और असंवैधानिक माना जाएगा।

यह फैसला पेसा अधिनियम की धाराओं 4 (क), 4 (घ), 4 (च) और 4 (ज) के तहत ग्रामसभा के निर्विवाद अधिकारों को मजबूती से स्थापित करता है।



स्थानीय लोगों की जीत—परंपराओं और प्रकृति की रक्षा के नाम एक मिसाल

बायसी ग्रामसभा का यह निर्णय धरमजयगढ़ क्षेत्र में जंगल–जल–जमीन की सुरक्षा और आदिवासी समुदाय की सांस्कृतिक अस्मिता की लड़ाई में एक नई मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।
ग्रामवासियों का कहना है कि यह सिर्फ खनन विरोध नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा का अभियान है।

समाचार सहयोगी सिकंदर चौहान

Amar Chouhan

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