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बर्ड फ्लू का साया: बिलासपुर संभाग में लापरवाही से बढ़ा खतरा, 47 हजार पक्षी-अंडे नष्ट — प्रशासन की भूमिका पर सवाल

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com

बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से सामने आए बर्ड फ्लू के मामले ने पूरे संभाग में चिंता की लकीरें खींच दी हैं। कोनी स्थित एक पोल्ट्री फार्म में संक्रमण की पुष्टि के बाद हालात अचानक गंभीर हो गए। शुरुआती दौर में करीब 5 हजार मुर्गियों की मौत ने ही खतरे का संकेत दे दिया था, लेकिन इसके बाद जो तथ्य सामने आए, उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

संक्रमण की पुष्टि होते ही प्रशासन हरकत में आया और तय प्रोटोकॉल के तहत 10 किलोमीटर के दायरे में व्यापक कार्रवाई की गई। इस दौरान 22 हजार से अधिक पक्षियों और लगभग 25 हजार अंडों को नष्ट किया गया। कुल मिलाकर 47 हजार से ज्यादा पक्षी और अंडे खत्म कर दिए गए, ताकि संक्रमण की श्रृंखला को यहीं रोका जा सके।

लेकिन इस पूरी कवायद के बीच एक बड़ा सवाल यह है कि जब मुर्गियों की असामान्य मौतें हो रही थीं, तब भी अंडों और चूजों की सप्लाई पूरे बिलासपुर संभाग में जारी कैसे रही? स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, कई इलाकों में बिना किसी रोक-टोक के सप्लाई होती रही, जिससे संक्रमण के फैलाव का खतरा और बढ़ गया। यह लापरवाही केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम के रूप में देखी जा रही है।

स्थिति को और चिंताजनक तब बना दिया जब खमताई क्षेत्र में मृत मुर्गियों को खुले में फेंका हुआ पाया गया। संक्रमण जैसे संवेदनशील मामले में इस तरह की अनदेखी न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र को जोखिम में डालने जैसा है।

जांच रिपोर्ट में बर्ड फ्लू की पुष्टि होते ही प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए 25 मार्च से कानन पेंडारी जू को 7 दिनों के लिए बंद कर दिया। साथ ही चिकन और अंडे की दुकानों को भी बंद कराने के निर्देश दिए गए। हालांकि जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आई—कई जगहों पर दुकानदार नियमों की अनदेखी करते हुए खुलेआम कारोबार करते दिखे।

पशु चिकित्सा विभाग ने सप्लाई चेन से जुड़े आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि संक्रमण के दौरान किन-किन क्षेत्रों में अंडे और चूजों की सप्लाई हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। यदि समय रहते सख्ती नहीं बरती गई, तो यह लापरवाही बड़े स्तर पर संक्रमण फैलाने का कारण बन सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बर्ड फ्लू जैसे मामलों में शुरुआती सतर्कता और सख्त निगरानी ही सबसे प्रभावी उपाय होती है। लेकिन बिलासपुर के इस मामले में शुरुआती ढिलाई ने हालात को और जटिल बना दिया।

अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस पूरे घटनाक्रम में जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई करता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल, आम नागरिकों से सावधानी बरतने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की गई है, लेकिन सवाल अब भी वही है—क्या यह सब टाला जा सकता था?

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Amar Chouhan

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