बरमकेला में ‘पत्रकार’ के नाम पर कथित उगाही: सरपंचों का सामूहिक प्रतिवाद, प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
सारंगढ़-बिलाईगढ़।
बरमकेला ब्लॉक की ग्राम पंचायतों में इन दिनों एक अलग तरह की हलचल है। विकास कार्यों के बीच उपजी एक गंभीर शिकायत ने सरपंचों को एक मंच पर ला खड़ा किया है। आरोप है कि कुछ लोग पत्रकारिता की आड़ लेकर पंचायत प्रतिनिधियों पर दबाव बना रहे हैं और अवैध उगाही की कोशिश कर रहे हैं। इस मुद्दे पर सरपंच संघ बरमकेला ने पुलिस अधीक्षक, सारंगढ़ को लिखित शिकायत सौंपकर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
मामला ग्राम पंचायत करपी में निर्माणाधीन चेक डेम कार्य से जुड़ा बताया जा रहा है। सरपंच संघ का कहना है कि कार्य के दौरान तथाकथित पत्रकार दिनेश जायसवाल और सुनील टंडन पर अवैध उगाही के आरोप लगे हैं। शिकायत में अजय साहू का नाम भी उल्लेखित है। सरपंचों का आरोप है कि कुछ बाहरी लोग पत्रकारिता का परिचय देकर पंचायत प्रतिनिधियों पर मानसिक दबाव बनाते हैं और कार्यों में अनावश्यक व्यवधान डालते हैं।
सरपंचों का कहना है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही से उन्हें कोई परहेज नहीं, लेकिन यदि पत्रकारिता की आड़ में भय और उगाही का वातावरण बनाया जाएगा तो इसका विरोध स्वाभाविक है।
बैठक में एक स्वर: “फर्जी तत्वों से सख्ती जरूरी”
इस संवेदनशील विषय पर सरपंच संघ ने स्थानीय पत्रकारों को भी बैठक में आमंत्रित किया, ताकि बात एकतरफा न रहे। बैठक में अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति के पदाधिकारियों सहित कई स्थानीय पत्रकार उपस्थित रहे। चर्चा के दौरान यह स्पष्ट संदेश सामने आया कि कुछ व्यक्तियों की गतिविधियों से निष्पक्ष पत्रकारिता की साख प्रभावित हो रही है।
जिलाध्यक्ष खगेश्वर रात्रे ने कहा कि पंचायतें विकास की इकाई हैं और वे पूरी पारदर्शिता के साथ काम करना चाहती हैं। “यदि कोई व्यक्ति पत्रकारिता के नाम पर अवैध वसूली करेगा तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन से निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की अपेक्षा है,” उन्होंने दो टूक कहा।
ब्लॉक अध्यक्ष मोहन पटेल ने भी स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरपंच जनसेवा के लिए चुने जाते हैं। “उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी,” उन्होंने जोड़ा।
पत्रकार संगठन का समर्थन
अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति के जिलाध्यक्ष नरेश चौहान ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और इसकी विश्वसनीयता सर्वोपरि है। “कुछ तथाकथित लोग इस पेशे की गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आवश्यक है,” उन्होंने कहा।
कार्यकारी जिलाध्यक्ष देवराज दीपक ने भी जोर देकर कहा कि संगठन निष्पक्ष और जिम्मेदार पत्रकारिता के पक्ष में है। “जो लोग पत्रकारिता के नाम पर अवैध उगाही कर रहे हैं, वे समाज और मीडिया दोनों के लिए कलंक हैं। प्रशासन को चाहिए कि ऐसे तत्वों की पहचान कर कठोर कदम उठाए,” उन्होंने कहा।
जिले में चर्चा का विषय
बरमकेला में उठी यह आवाज अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गई है। पंचायत प्रतिनिधियों का सामूहिक प्रतिवाद इस बात का संकेत है कि ग्रामीण स्तर पर भी जनप्रतिनिधि अपनी गरिमा और अधिकारों को लेकर सजग हैं।
अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या शिकायत की निष्पक्ष जांच होगी और दोषी पाए जाने पर कठोर कदम उठाए जाएंगे? यह आने वाला समय बताएगा। फिलहाल, बरमकेला की पंचायतों ने यह संदेश जरूर दे दिया है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता के साथ-साथ गरिमा की रक्षा भी उतनी ही आवश्यक है।
News associate Fake journalist (FeNku)