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पटवारियों का सब्र टूटा: धान पट्टों से भूमि अर्जन तक, प्रशासनिक दबावों के खिलाफ खुला मोर्चा

फ्रीलांस एडिटर अमरदीप चौहान/अमरखबर.कॉम | रायगढ़ | 11 जनवरी 2026

रायगढ़ जिले में राजस्व व्यवस्था की नींव माने जाने वाले पटवारियों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। पटवारी संघ छत्तीसगढ़, तहसील रायगढ़ के बैनर तले सामने आए आरोपों ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संघ का साफ कहना है कि शासन के निर्देशों के विपरीत पटवारियों पर लगातार असंगत और अनुचित दबाव बनाया जा रहा है, जिससे न केवल उनका कामकाज प्रभावित हो रहा है, बल्कि उनकी सामाजिक और पेशेवर छवि भी दांव पर लग रही है।

पटवारी संघ के रजिस्ट्रार द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि धान से जुड़े मामलों में तथाकथित “भौतिक आवेदन” के नाम पर पटवारियों को किसानों से कर्ज लेने और जमीन से जुड़े निर्णयों में जबरन घसीटा जा रहा है। यह न केवल नियमों की खुली अवहेलना है, बल्कि पटवारियों को अनावश्यक विवादों में फंसाने का जरिया भी बनता जा रहा है। संघ का आरोप है कि इस तरह की प्रक्रियाएं जानबूझकर थोपी जा रही हैं, ताकि बाद में सारा दोष मैदानी अमले पर मढ़ा जा सके।

भूमि अर्जन के मामलों में भी स्थिति कम गंभीर नहीं है। रिंग रोड सहित अन्य संरचनात्मक परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान वैधानिक प्रक्रिया को ताक पर रखकर पटवारियों पर दबाव और शोषण किया जा रहा है। संघ का कहना है कि कानून के दायरे में काम करने के बजाय उनसे ऐसे आदेशों का पालन कराने की कोशिश की जा रही है, जिनकी जिम्मेदारी लेने से अधिकारी कतराते हैं।

वेतनमान, अवकाश और सामाजिक सुरक्षा जैसे बुनियादी मुद्दे भी वर्षों से लंबित हैं। सड़क दुर्घटना में मृत पटवारियों के परिजनों को आज तक सहायता राशि न मिलना प्रशासन की संवेदनहीनता को उजागर करता है। घोषित अवकाशों का लाभ न दिया जाना, निलंबित पटवारियों के मामलों में अनावश्यक विलंब और निजी कार्यों में जबरन ड्यूटी लगाए जाने जैसे आरोपों ने आक्रोश को और भड़का दिया है।

पटवारी संघ का कहना है कि वे लंबे समय से इन समस्याओं को शांतिपूर्ण ढंग से उठाते रहे हैं, लेकिन हर बार आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। अब हालात ऐसे बन गए हैं कि चुप रहना अपने ही अधिकारों से समझौता करने जैसा होगा। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं निकला तो आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

राजस्व व्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले पटवारियों की यह नाराजगी केवल एक वर्ग का असंतोष नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की विफलता का संकेत है, जहां नियमों से ज्यादा दबाव और निर्देश हावी हैं। सवाल यह है कि क्या प्रशासन समय रहते हालात संभालेगा, या फिर यह असंतोष आने वाले दिनों में बड़े टकराव का रूप ले लेगा? जवाब फिलहाल फाइलों और बैठकों के बीच कहीं अटका हुआ है।

Amar Chouhan

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