नववर्ष पर भक्ति और आत्मबोध का संगम: गिरिशिमा में गूंजा जयगुरुदेव नाम प्रभु का

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
जयगुरुदेव नाम प्रभु का—इसी पावन उद्घोष के साथ नववर्ष के शुभ अवसर पर ग्राम गिरिशिमा, ब्लॉक हेमगिरि, जिला सुंदरगढ़ (ओडिशा) में एक दिव्य और भावपूर्ण आध्यात्मिक सत्संग का भव्य आयोजन किया गया। विश्वविख्यात परम संत बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के पावन आशीर्वाद से तथा जयगुरुदेव संगत गिरिशिमा के सहयोग से आयोजित यह सत्संग श्रद्धा, भक्ति और आत्मचिंतन का अनुपम उदाहरण बन गया।
इस विशेष अवसर पर छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. कमल सिंह पटेल जी महाराज की उपस्थिति श्रद्धालुओं के लिए सौभाग्य का विषय रही। उनके श्रीमुख से प्रवाहित अमृतवाणी ने श्रोताओं को केवल सुना ही नहीं, बल्कि भीतर तक झकझोर दिया। उन्होंने सहज शब्दों में मानव जीवन की सार्थकता, जन्म के उद्देश्य और आत्मा के कल्याण के मार्ग पर विस्तार से प्रकाश डाला। उनकी वाणी में अनुभव की गंभीरता और साधना की सादगी स्पष्ट झलक रही थी।

सत्संग के दौरान यह संदेश बार-बार उभरकर सामने आया कि यह अनमोल मानव जीवन यूं ही नहीं मिला है। भौतिक आकर्षणों से परे जाकर आत्मचिंतन, संयम और सदमार्ग ही वह रास्ता है, जिससे आत्मा का उद्धार संभव है। गुरुवाणी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को अपने जीवन की दिशा पर पुनर्विचार करने और सत्कर्मों के पथ पर अग्रसर होने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम स्थल का वातावरण पूरे समय भक्ति, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। श्रद्धालुजन ध्यानमग्न होकर प्रवचनों का रसपान करते नजर आए। कहीं मौन साधना थी, तो कहीं भक्ति भाव से भरे जयकारे—हर ओर एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार महसूस किया गया, जिसने मन को स्थिरता और आत्मा को शांति प्रदान की।

सत्संग के अंत में जयगुरुदेव आश्रम, मथुरा में आयोजित होने वाले महापर्व होली (3, 4 एवं 5 मार्च) में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का सादर आमंत्रण दिया गया। इस महापर्व को आत्मशुद्धि, संगति और आध्यात्मिक उन्नयन का विशेष अवसर बताते हुए श्रद्धालुओं से सहभागिता की अपील की गई।
कुल मिलाकर, गिरिशिमा में आयोजित यह सत्संग केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मबोध और जीवन-दर्शन का जीवंत संदेश बनकर उभरा। नववर्ष की शुरुआत ऐसे आध्यात्मिक वातावरण में होना, उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए निस्संदेह एक स्मरणीय और प्रेरणादायी अनुभव रहा।