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नई दिशा की ओर भारत-अमेरिका व्यापार संबंध: ट्रंप–मोदी वार्ता के बाद टैरिफ तनाव में आई नरमी, 25% से घटकर 18% हुआ शुल्क

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com

वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच लंबे समय से चला आ रहा व्यापारिक तनाव सोमवार को उस वक्त कुछ हल्का पड़ा, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर प्रस्तावित 25 प्रतिशत प्रतिशोधात्मक टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने की औपचारिक घोषणा की। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से टेलीफोन पर हुई बातचीत के बाद सामने आया, जिसे दोनों देशों के रिश्तों में “विश्वास बहाली की पहल” के रूप में देखा जा रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस निर्णय को केवल आर्थिक नहीं, बल्कि कूटनीतिक संकेत बताते हुए कहा—

> “This decision has been taken in the spirit of friendship and mutual respect.”
(यह निर्णय दोस्ती और आपसी सम्मान की भावना के तहत लिया गया है।)



ट्रंप के इस बयान से साफ है कि व्हाइट हाउस अब भारत को केवल एक व्यापारिक साझेदार नहीं, बल्कि रणनीतिक सहयोगी के तौर पर भी देख रहा है।

ऊर्जा नीति पर भी हुई अहम चर्चा

बातचीत के दौरान ऊर्जा व्यापार एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा। राष्ट्रपति ट्रंप ने खुलासा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने रूस से कच्चे तेल की खरीद कम करने और अमेरिका के साथ-साथ संभावित रूप से वेनेजुएला से तेल आयात पर विचार करने की बात कही है।

इस संदर्भ में ट्रंप ने कहा—

> “Prime Minister Modi expressed his willingness to explore energy purchases from the United States and potentially from Venezuela, reducing dependency elsewhere.”
(प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका और संभवतः वेनेजुएला से ऊर्जा खरीदने की इच्छा जताई है, जिससे अन्य स्रोतों पर निर्भरता कम हो सकती है।)



यह बयान भारत-अमेरिका संबंधों को केवल व्यापार तक सीमित न रखकर ऊर्जा और वैश्विक भू-राजनीति के बड़े फ्रेम में ले जाता है।

टैरिफ घटा, लेकिन चुनौती खत्म नहीं

हालांकि 25 प्रतिशत के मुकाबले 18 प्रतिशत टैरिफ को राहत माना जा रहा है, लेकिन व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि यह दर अब भी कई भारतीय निर्यात क्षेत्रों—विशेषकर टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स और ऑटो कंपोनेंट्स—के लिए ऊँची है। इसके अलावा, अमेरिका द्वारा पहले से लगाए गए कुछ सेक्टोरल शुल्क अब भी प्रभावी हैं, जो भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा को सीमित कर सकते हैं।

एक वरिष्ठ व्यापार विश्लेषक के अनुसार,
“यह फैसला दरवाज़ा खोलता है, लेकिन पूरी राह अभी साफ नहीं करता।”

मोदी का आभार, साझेदारी पर भरोसा

टैरिफ में कटौती के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों के लिए यह फैसला भारत के 140 करोड़ लोगों के हित में है। उन्होंने दोनों देशों की साझेदारी को “अभूतपूर्व ऊंचाइयों” तक ले जाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

नई शुरुआत या अस्थायी विराम?

भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्ते बीते कुछ समय से टैरिफ विवाद और रूसी तेल आयात को लेकर असहज दौर से गुजर रहे थे। कई मौकों पर बातचीत रुकने की स्थिति भी बनी। ऐसे में यह समझौता एक नई शुरुआत जैसा प्रतीत होता है, बशर्ते आगे की वार्ताएं संतुलन और व्यावहारिकता के साथ आगे बढ़ें।

फिलहाल इतना तय है कि ट्रंप-मोदी संवाद ने जमे हुए रिश्तों में हलचल पैदा की है। अब नजर इस बात पर टिकी है कि यह नरमी स्थायी साझेदारी में बदलती है या सिर्फ कूटनीतिक राहत बनकर रह जाती है।

Amar Chouhan

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