धान खरीदी की जमीनी हकीकत उजागर — बोरा, नेटवर्क और तौल पर सवाल, संगठनों ने मौके पर दिलाई किसानों को राहत

रायगढ़।
जिले में धान खरीदी को लेकर प्रशासनिक दावों और जमीनी सच्चाई के बीच का फासला एक बार फिर सामने आया है। जिला उपभोक्ता उत्थान संगठन और सुंदर समाज पार्टी के संयुक्त हस्तक्षेप से कुछ किसानों को तत्काल राहत तो मिली, लेकिन खरीद व्यवस्था की खामियां अब भी सवालों के घेरे में हैं।
जिला उपभोक्ता उत्थान संगठन के जिला अध्यक्ष डॉ. वासुदेव यादव और सुंदर समाज पार्टी के राष्ट्रीय सचिव श्री नर्सिंग राव ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि कुड़ुमकेला निवासी साहिश राम पिता परमेश्वर को धान बेचने में गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। वहीं डुमरपाली, कुड़ुमकेला की आशो बाई पत्नी निर्मल राठिया को पर्याप्त बारदाना उपलब्ध नहीं कराया जा रहा था। दोनों ही मामलों में संगठन की टीम ने मौके पर हस्तक्षेप कर समस्या का समाधान कराया और किसानों को राहत दिलवाई।
धान खरीदी की मात्रा को लेकर भी असंतोष सामने आया है। संगठन से जुड़े राजेश दुबे ने बताया कि शासन द्वारा प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी का प्रावधान है, लेकिन कई केंद्रों पर मात्र 16 क्विंटल ही लिया जा रहा है। इसे किसानों के साथ अन्याय बताते हुए संगठन ने संबंधित विभाग को लिखित शिकायत भेजने की बात कही है।
लेमरू क्षेत्र के किसानों ने और भी गंभीर आरोप लगाए। किसानों का कहना है कि वहां आठ क्विंटल तक धान को “अनावरी” बताकर नहीं लिया जा रहा, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं नाम न छापने की शर्त पर कुदरमाल, कुदमुरा, लेमरू, चिरा और चाचिया के ग्रामीणों ने बताया कि इन इलाकों में नेटवर्क की भारी समस्या है। कई केंद्रों पर इंटरनेट नहीं चलता, जबकि श्यांग क्षेत्र में वाई-फाई के सहारे काम किया जा रहा है, जो व्यवस्था में असमानता को दर्शाता है।
खरीदी केंद्रों पर राइस मिलों द्वारा दिए जा रहे बारदाने की गुणवत्ता पर भी सवाल उठे हैं। किसानों का आरोप है कि घटिया और कमजोर बारदाना दिया जा रहा है, जिससे धान खराब होने का खतरा बना रहता है। इसके साथ ही शेड की क्षमता को लेकर भी नाराजगी जताई गई। किसानों का कहना है कि शेड स्टैक की क्षमता कम से कम 50 टन होनी चाहिए, लेकिन कई केंद्रों पर यह सुविधा नहीं है। फेंसिंग और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव भी बताया गया, जबकि इन मदों के लिए बजट उपलब्ध न कराए जाने की बात सामने आई है। संगठनों ने सरकार से इन मुद्दों पर तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है।
टीम के अन्य पदाधिकारियों—प्रदेश संगठन मंत्री शेखर यादव, जिला संगठन मंत्री रामलखन पासवान और जिला उपाध्यक्ष संजय चौहान—ने बताया कि अधिकांश धान मंडियों में खरीदी शांतिपूर्ण ढंग से चल रही है, लेकिन कुछ स्थानों पर पंजीयन में दिक्कतें और नमी के नाम पर अतिरिक्त धान लेने जैसी शिकायतें मिल रही हैं। संगठन ने किसानों से कहा है कि वे इन समस्याओं की लिखित शिकायत दें, ताकि उन्हें उचित मंच पर उठाया जा सके।
इसी क्रम में संगठन ने खरसिया रेलवे स्टेशन से जुड़ा एक और मुद्दा उठाते हुए स्टेशन प्रबंधक से निरीक्षण की अनुमति भी प्राप्त कर ली है। संगठनों का कहना है कि आने वाले दिनों में वे न सिर्फ धान खरीदी बल्कि अन्य जनहित के मुद्दों पर भी जमीनी पड़ताल कर प्रशासन के समक्ष वास्तविक स्थिति रखेंगे।