तीन हजार नहीं, तीन लाख नहीं… सीधे 30 लाख का खेल: वाड्रफनगर जनपद के पूर्व CEO श्रवण मरकाम सलाखों के पीछे

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
बलरामपुर/वाड्रफनगर।
सरकारी फाइलों में “पूर्ण” दिखाए गए विकास कार्य जब ज़मीन पर अधूरे या गायब मिले, तो वर्षों पुराना मामला आखिरकार गिरफ्तारी तक पहुंचा। वर्ष 2013-14 में जनपद पंचायत वाड्रफनगर में हुए लगभग 30 लाख रुपये के शासकीय गबन प्रकरण में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) श्रवण मरकाम को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। लंबे समय से फरार चल रहे मरकाम को वाड्रफनगर पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर दबिश देकर पकड़ा।
फाइलों में विकास, जमीन पर सवाल
मामला उस समय का है जब श्रवण मरकाम जनपद पंचायत वाड्रफनगर में CEO पद पर पदस्थ थे। आरोप है कि विभिन्न विकास कार्यों और योजनाओं के नाम पर स्वीकृत शासकीय राशि के उपयोग में गंभीर अनियमितताएं की गईं। कुटरचित दस्तावेज तैयार कर, भुगतान प्रक्रिया में हेरफेर करते हुए लगभग 30 लाख रुपये की राशि का गबन किया गया।
जांच से जुड़े सूत्र बताते हैं कि कई कार्यों को कागजों में पूर्ण दर्शाकर भुगतान कर दिया गया, जबकि मौके पर वे कार्य अधूरे, निम्न गुणवत्ता के या पूरी तरह अस्तित्वहीन पाए गए। प्रारंभिक शिकायतों के बाद विभागीय जांच और ऑडिट रिपोर्ट में अनियमितताओं की पुष्टि होने पर मामला पुलिस तक पहुंचा और आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया।
दस्तावेजों की परतें खुलीं तो सामने आई कूटरचना
विवेचना के दौरान वित्तीय अभिलेख, भुगतान रजिस्टर, मस्टर रोल और निर्माण कार्यों से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से जांच की गई। कई अभिलेख संदिग्ध पाए गए। आरोप है कि फर्जी हस्ताक्षर, कूटरचना और मिलीभगत के जरिए शासकीय धन का दुरुपयोग किया गया।
इस प्रकरण में पूर्व में चार अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह कोई एकल निर्णय का मामला नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से किया गया वित्तीय अपराध है। विभागीय कर्मचारियों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
फरारी से गिरफ्तारी तक
सूत्रों के अनुसार, श्रवण मरकाम लंबे समय से गिरफ्तारी से बचते रहे। पुलिस को हाल ही में उनकी मौजूदगी की गुप्त सूचना मिली। इसके बाद विशेष टीम गठित कर दबिश दी गई और उन्हें हिरासत में लिया गया। न्यायालय में पेशी के बाद अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
पुलिस ने शासकीय धन के गबन, कूटरचना और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। हालांकि विस्तृत धाराओं का खुलासा अभी नहीं किया गया है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि विवेचना आगे बढ़ने के साथ और तथ्य सामने आ सकते हैं।
जांच की दिशा अब बैंक खातों तक
जांच अब केवल कागजी अभिलेखों तक सीमित नहीं है। पुलिस बैंक खातों, लेन-देन के विवरण और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल कर रही है। पूछताछ के दौरान अन्य नामों के सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।
प्रशासनिक हलकों में हलचल
गिरफ्तारी की खबर सामने आते ही जनपद पंचायत और स्थानीय प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। वर्षों से लंबित इस मामले में कार्रवाई होने से आम नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शुरुआती स्तर पर ही कठोर निगरानी और समयबद्ध जांच होती, तो सरकारी धन की हानि को रोका जा सकता था। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की परतें किस हद तक खोल पाती हैं।
यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि विकास योजनाओं के नाम पर जारी धन की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना केवल कागजी प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रशासनिक ईमानदारी की कसौटी है।