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तीन दिन का मौसमीय कहर: छत्तीसगढ़ में ओले, आंधी और बिजली का खतरा—15 जिलों में अलर्ट

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com

रायपुर। मार्च के आख़िरी दिनों में छत्तीसगढ़ का मौसम अचानक करवट ले चुका है। आमतौर पर इस वक्त तक तेज़ गर्मी अपना असर दिखाने लगती है, लेकिन इस बार हालात कुछ अलग हैं। वायुमंडल में सक्रिय चक्रवातीय प्रणाली और द्रोणिका के संयुक्त प्रभाव ने प्रदेश के मौसम को अस्थिर बना दिया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले 72 घंटों के लिए चेतावनी जारी करते हुए साफ किया है कि राज्य के कई हिस्सों में आंधी, ओलावृष्टि और गरज-चमक के साथ बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह बदलाव सिर्फ सतही नहीं है, बल्कि ऊपरी वायुमंडलीय हलचलों का परिणाम है। उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ के हिस्सों में विशेष रूप से असर दिखेगा, जहां तेज हवाओं के साथ अचानक मौसम बिगड़ने की आशंका जताई गई है।

सरगुजा से बिलासपुर तक असर, हवा की रफ्तार भी बढ़ेगी
सरगुजा संभाग के अंबिकापुर, सूरजपुर और बलरामपुर जिलों में ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है, जो किसानों के लिए चिंता का कारण बन सकती है। वहीं बिलासपुर संभाग के रायगढ़, जांजगीर-चांपा और सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने के संकेत हैं। इसके साथ हल्की से मध्यम बारिश भी हो सकती है, जिससे दिन के तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी।

मध्य छत्तीसगढ़ के रायपुर, दुर्ग और धमतरी जैसे जिलों में बादलों की आवाजाही बढ़ने लगी है। मौसम विभाग का अनुमान है कि यहां तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की कमी आ सकती है। फिलहाल रायपुर में अधिकतम तापमान 38.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है, लेकिन आने वाले दिनों में इसमें नरमी संभव है।

राहत के साथ जोखिम भी, किसानों की बढ़ी चिंता
एक ओर जहां इस बदलाव से लू के असर में कमी आने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि रबी की फसलों के लिए खतरा बन सकती है। खासकर गेहूं और दलहन की फसलें इस समय कटाई के करीब होती हैं, ऐसे में ओले गिरने से नुकसान की आशंका बढ़ जाती है।

मौसम विभाग ने ग्रामीण इलाकों में आकाशीय बिजली को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। खुले मैदान, पेड़ों के नीचे या पानी के पास खड़े होने से बचने की हिदायत दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की मौसमी उथल-पुथल अगले तीन दिनों तक रुक-रुक कर जारी रह सकती है।

मौसम का यह मिजाज असामान्य नहीं, लेकिन सतर्कता जरूरी
विशेषज्ञ मानते हैं कि प्री-समर सीजन में इस तरह की गतिविधियां नई नहीं हैं, लेकिन इस बार इनकी तीव्रता और दायरा कुछ ज्यादा है। ऐसे में प्रशासन और आम लोगों—दोनों के लिए सतर्क रहना जरूरी है, ताकि किसी भी संभावित नुकसान को कम किया जा सके।

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Amar Chouhan

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