तमनार में कोयला मिक्सिंग का बड़ा खुलासा: जेपीएल में दो ट्रेलरों से मिला मिलावटी कोयला, ड्राइवर फरार – ठेकेदार और माफिया के गठजोड़ पर उठे सवाल
फ्रीलांस एडिटर अमरदीप चौहान/अमरखबर.कॉम
तमनार/रायगढ़।
जिले में कोयले की मिलावट का खेल एक बार फिर बेनकाब हुआ है। जेपीएल (JPL) तमनार में दो ट्रेलरों से मिले मिलावटी कोयले ने न सिर्फ प्रशासन को चौंका दिया है, बल्कि कोल माफिया, परिवहन ठेकेदारों और सिस्टम के भीतर छिपे संरक्षण को भी एक बार फिर कटघरे में ला खड़ा किया है। शुरुआती जांच में पाया गया है कि कोयले में स्लैग और डस्ट मिलाकर सप्लाई की गई थी। दोनों ट्रेलरों के ड्राइवर घटना के बाद फरार हो गए हैं। पुलिस ने मामले में BNS की धारा 3(5) और 316(3) के तहत अपराध दर्ज किया है।
दीपका माइंस से आया कोयला, रास्ते में बदल गया ‘ग्रेड’
कोरबा की दीपका खदान से जिंदल पावर लिमिटेड तमनार के लिए कोयला परिवहन का ठेका आरके ट्रांसपोर्ट एंड कंस्ट्रक्शन (RKTC) को दिया गया था।
30 अक्टूबर की रात ट्रेलर क्रमांक CG 10 BS 5338 (ड्राइवर दीपक) और CG 10 BR 6751 (ड्राइवर सावन) कोयला लोड कर जेपीएल पहुंचे और रात में डिस्पैच खाली कर दिया।
अगली सुबह जेपीएल टीम ने जब स्टॉक का निरीक्षण किया तो पाया कि—
कोयले में स्लैग, डस्ट और कचरा मिलाया गया है
गुणवत्ता निर्धारित मानक से काफी कम पाई गई
एक ड्राइवर ट्रेलर सहित गायब
दूसरा वाहन वहीं छोड़कर फरार
इसके बाद आरकेटीसी के सुपरवाइजर दिनेश चौहान ने तमनार थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
गायब हैं असली सूत्रधार, फंस रहा सिर्फ ड्राइवर
कोयला मिक्सिंग का यह पहला मामला नहीं है, लेकिन हर बार की तरह इस बार भी FIR सिर्फ ड्राइवरों पर दर्ज हुई है।
यह सवाल खड़ा हो गया है कि—
ट्रेलर रास्ते में कहां और किसके डिपो पर खाली हुए?
स्लैग और डस्ट किसने और किसके कहने पर मिलाया?
कोल माफिया कौन है, और कार्रवाई उनसे परे क्यों रहती है?
स्थानीय सूत्र बताते हैं कि कई बड़े कोल डिपो रातों-रात सक्रिय हो जाते हैं और वहीं कोयले की गुणवत्ता बदल दी जाती है। करोड़ों की अवैध कमाई का यह खेल लंबे समय से जारी है, लेकिन कार्रवाई सिर्फ वाहक यानी ड्राइवरों तक ही सीमित रहती है।
कंपनियों पर भी सवाल—क्वालिटी चेक सिस्टम की क्या विश्वसनीयता?
खदानों से कोयला ‘ग्रेड-A’ में निकलता है, लेकिन प्लांट तक पहुंचते-पहुंचते ‘डस्ट कोयला’ बन जाता है।
यह स्थिति बताती है कि—
परिवहन मार्गों में निगरानी बेहद कमजोर
कोल डिपो और परिवहन कंपनियों के बीच सांठगांठ
और स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक कार्रवाई पर भी सवाल
बीते वर्षों में अडाणी पावर, एनटीपीसी, जेपीएल सहित कई बड़े प्लांटों में मिलावट की घटनाएं पकड़ी जा चुकी हैं, लेकिन माफिया के मास्टरमाइंड कभी गिरफ्तार नहीं होते।
स्थानीय उद्योगों पर बड़ा असर
मिलावटी कोयला—
बॉयलर की कार्यक्षमता घटाता है
प्लांट में डाउनटाइम बढ़ाता है
उत्पादन लागत बढ़ाता है
और पर्यावरणीय प्रदूषण भी बढ़ाता है
उद्योग जगत इसे “अवैध सिंडिकेट” की देन बताता है।
पुलिस ने दर्ज किया मामला, लेकिन बहुत से सवाल अनुत्तरित
तमनार पुलिस ने दोनों ड्राइवरों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है, लेकिन—
ट्रेलरों का GPS डेटा
रास्ते में की गई रुकावटें
किस डिपो में खाली किया गया
किसके निर्देश पर मिलावट हुई
इन सवालों पर अभी भी जांच का इंतजार है।
स्थानीय लोग खुलकर कहते हैं कि “ड्राइवर तो मोहरा है, खेल कहीं और चलता है।”
इस ताजा घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि कोयला परिवहन में माफिया का नेटवर्क कितना मजबूत है और सिस्टम कितनी कमजोर। जब तक कार्रवाई सिर्फ ड्राइवरों और छोटे कर्मचारियों पर सीमित रहेगी, तब तक मिलावट का यह खेल बंद होना मुश्किल है।
रायगढ़ और कोरबा के बीच चल रहा यह काला कारोबार अब खुली चुनौती बन चुका है—जिसे रोकने के लिए इच्छाशक्ति और पारदर्शिता दोनों की जरूरत है।
समाचार सहयोगी सिकंदर चौहान