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“तमनार नगर पंचायत पर ब्रेक” — हाई कोर्ट की अंतरिम रोक से प्रशासनिक प्रक्रिया थमी, ग्राम पंचायत को राहत

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com

रायगढ़/बिलासपुर से विशेष रिपोर्ट।
तमनार को नगर पंचायत के रूप में गठित करने की प्रक्रिया पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बड़ा हस्तक्षेप करते हुए संबंधित अधिसूचना के प्रभाव और संचालन पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत के इस आदेश से नगर पंचायत गठन के बाद बनाई गई समिति की कार्यवाही फिलहाल स्थगित हो गई है और मौजूदा ग्राम पंचायत को अपना कामकाज जारी रखने की अनुमति मिल गई है।

मामला ग्राम पंचायत तमनार बनाम राज्य शासन से जुड़ा है, जिसमें नगर पंचायत गठन और उसके बाद समिति गठन को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि तमनार ब्लॉक अनुसूचित क्षेत्र घोषित है, इसके बावजूद अधिसूचना जारी कर ग्राम पंचायत तमनार और बसनपाली को मिलाकर नगर पंचायत गठित कर दी गई। इसके बाद नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 16(1) के तहत समिति भी बना दी गई, जिसे नियमों के विपरीत बताया गया।

अदालत के समक्ष यह भी तर्क रखा गया कि अधिसूचना जारी होने के बाद भी संक्रमण काल में जब तक नई नगर पंचायत का निर्वाचन नहीं हो जाता, तब तक संबंधित क्षेत्र पर ग्राम पंचायत का ही अधिकार बना रहता है। इसी आधार पर अधिसूचना दिनांक 16 फरवरी 2026 के जरिए गठित समिति को चुनौती देते हुए अंतरिम संरक्षण की मांग की गई।

राज्य की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया और यह कहा गया कि अधिसूचना ग्राम पंचायत बसनपाली के प्रस्ताव के आधार पर जारी की गई है, इसलिए अंतरिम राहत नहीं दी जानी चाहिए। हालांकि अदालत ने प्रथम दृष्टया प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए अंतरिम व्यवस्था लागू कर दी।

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि 16 फरवरी 2026 को प्रकाशित अधिसूचना, जिसके तहत समिति का गठन किया गया था, उसका प्रभाव अगली सुनवाई तक स्थगित रहेगा। साथ ही याचिकाकर्ता यानी ग्राम पंचायत को अपना नियमित कार्य जारी रखने की अनुमति दी गई है। मामले को संबंधित अन्य याचिका के साथ अगली तारीख पर सूचीबद्ध करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

इस फैसले के बाद तमनार क्षेत्र में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। नगर पंचायत गठन से जुड़े विकास कार्य, वित्तीय स्वीकृतियां और प्रशासनिक निर्णय फिलहाल अनिश्चितता के दौर में पहुंच गए हैं। एक ओर इसे स्थानीय स्वशासन के अधिकारों की रक्षा के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर नगर पंचायत के जरिए प्रस्तावित शहरी विकास योजनाओं पर विराम लगने की चर्चा भी है।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि आदेश की विस्तृत प्रति का अध्ययन कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। वहीं याचिकाकर्ता पक्ष इसे पारदर्शिता और संवैधानिक प्रक्रिया की जीत मान रहा है। अब सबकी निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि तमनार नगर पंचायत का रास्ता साफ होता है या प्रशासनिक ढांचे में नया मोड़ आता है।

Amar Chouhan

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