तमनार आंदोलन में शर्मनाक मोड़: हिंसा की आड़ में महिला आरक्षक से अभद्रता, पुलिस ने कसरा शिकंजा

फ्रीलांस एडिटर अमरदीप चौहान/अमरखबर.कॉम रायगढ़।
तमनार में कोयला खदान के विरोध में चल रहे जनआंदोलन के दौरान सामने आई एक गंभीर और निंदनीय घटना ने पूरे आंदोलन की नैतिकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शांतिपूर्ण विरोध की आड़ में कुछ असामाजिक तत्वों ने कानून की सीमाएं लांघते हुए एक महिला आरक्षक के साथ अभद्रता की, जिससे न सिर्फ पुलिस महकमे बल्कि पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है।
घटना बीते शनिवार की बताई जा रही है। आंदोलन के दौरान हालात उस वक्त बिगड़े जब कोयला वाहनों को आगे बढ़ाने को लेकर पुलिस और ग्रामीणों के बीच तीखी झड़प हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विवाद के बीच धक्का-मुक्की हुई और हालात अचानक हिंसक हो गए। इसी अफरा-तफरी में कुछ पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की गई, वहीं टीआई कमला पुसाम भी इस हिंसा में घायल हो गईं।

इसी उग्र माहौल का गलत फायदा उठाते हुए युवकों के एक समूह ने एक महिला आरक्षक को घेर लिया। खुद को बचाने के लिए महिला आरक्षक पास के खेत की ओर भागी, लेकिन वहां भी उसे नहीं बख्शा गया। आरोप है कि युवकों ने उसके साथ दुव्र्यवहार किया और वर्दी तक फाड़ दी। यही नहीं, इस शर्मनाक हरकत का वीडियो भी बनाया गया। सूत्रों का कहना है कि वीडियो को सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया था, जिसे बाद में हटवाया गया।
घटना की गंभीरता को देखते हुए तमनार पुलिस ने मामले में सख्त रुख अपनाया है। बीएनएस की धारा 109(1), 115(2), 132, 221, 296, 3(5), 309(4), 309(6), 351(2), 74, 76 और 67 ए-एलसीजी सहित कई गंभीर धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया है। अब तक कुल 9 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और आरोपियों की पहचान कर उनकी तलाश तेज कर दी गई है।

आंदोलन की साख को लगा गहरा आघात
गौरतलब है कि अपनी जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए चल रहे इस आंदोलन में महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई थी। लंबे समय तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन के कारण आंदोलन को सामाजिक समर्थन भी मिला। लेकिन महिला आरक्षक के साथ हुई यह बदसलूकी उस पूरे संघर्ष पर एक काला धब्बा बनकर उभरी है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आंदोलन की आड़ में कानून हाथ में लेने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। दोषियों की पहचान लगभग सुनिश्चित कर ली गई है और जल्द ही गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना साफ तौर पर बताती है कि किसी भी जायज मांग को हिंसा और अमानवीय कृत्यों से कमजोर नहीं पड़ने देना चाहिए, क्योंकि ऐसे कृत्य अंततः पूरे आंदोलन और समाज की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं।
समाचार सहयोगी सिकंदर चौहान