जशपुर में दिल दहला देने वाली वारदात: घर बनाने के विवाद में पिता ने आंगनबाड़ी सहायिका बेटी की ले ली जान

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
जशपुर जिले के नारायणपुर थाना क्षेत्र से रिश्तों को झकझोर देने वाली एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां घर निर्माण को लेकर हुए मामूली विवाद ने भयावह रूप ले लिया। आरोप है कि एक पिता ने आवेश में आकर अपनी ही आंगनबाड़ी सहायिका बेटी पर हमला कर उसकी हत्या कर दी। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है।
मकान निर्माण बना विवाद की वजह
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम जामटोली निवासी 23 वर्षीय बिंदिया लकड़ा गांव में आंगनबाड़ी सहायिका के रूप में कार्यरत थी। उसने घर के पास नया मकान बनाने के लिए नींव खुदवाकर बालू-रेत डलवाई थी। बुधवार दोपहर करीब तीन बजे उसके पिता लौरेस लकड़ा घर पहुंचे और निर्माण सामग्री मंगाने या पैसे देने को लेकर बेटी से बातचीत करने लगे।
बताया जा रहा है कि बातचीत जल्द ही तीखी बहस में बदल गई। ईंट-गिट्टी और पैसों के सवाल पर दोनों के बीच विवाद बढ़ गया और गुस्से में आकर पिता ने घर में रखी टांगी के पिछले हिस्से से बेटी के सिर पर वार कर दिया। गंभीर चोट लगने से बिंदिया लकड़ा की मौके पर ही मौत हो गई।
बहन की रिपोर्ट पर दर्ज हुआ हत्या का मामला
घटना की जानकारी मृतका की छोटी बहन अनुषा लकड़ा ने थाना नारायणपुर में दी। रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने आरोपी पिता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) के तहत हत्या का अपराध दर्ज किया। पुलिस ने तत्काल घटनास्थल का निरीक्षण कर पंचनामा कार्रवाई पूरी की और शव का पोस्टमार्टम कराया।
प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टरों ने सिर में गंभीर चोट को मृत्यु का कारण बताया है।
त्वरित कार्रवाई में आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने देर किए बिना आरोपी पिता लौरेस लकड़ा को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें उसने अपराध स्वीकार कर लिया। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद उसे विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। हत्या में प्रयुक्त टांगी भी आरोपी के कब्जे से जब्त कर ली गई है।
गांव में शोक और सवाल
घटना के बाद जामटोली और आसपास के गांवों में शोक का माहौल है। ग्रामीणों के मुताबिक, बिंदिया मेहनती और मिलनसार स्वभाव की युवती थी, जो परिवार के लिए घर बनवाने का सपना देख रही थी। उसी सपने को लेकर हुआ विवाद उसकी जिंदगी पर भारी पड़ गया।
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि पारिवारिक तनाव और आवेश में लिए गए फैसले किस तरह अपूरणीय क्षति में बदल जाते हैं।