छर्राटांगर की हेमकांता ने रचा कीर्तिमान, IISc बेंगलुरु तक पहुंची आदिवासी अंचल की प्रतिभा

फ्रीलांस एडिटर अमरदीप चौहान/अमरखबर.कॉम
घरघोड़ा | 5 जनवरी 2026
प्रतिभा किसी संसाधन की मोहताज नहीं होती—यह पंक्ति अगर कहीं साकार होती दिख रही है, तो वह है घरघोड़ा विकासखंड के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) छर्राटांगर की छात्रा हेमकांता राठिया की उपलब्धि में। सीमित साधनों और कठिन परिस्थितियों के बीच पढ़ाई करने वाली इस मेधावी छात्रा ने न केवल अपने विद्यालय बल्कि पूरे रायगढ़ जिले को गौरवान्वित किया है।
कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा में पूरे छत्तीसगढ़ में द्वितीय स्थान हासिल करने वाली हेमकांता का चयन अब भारत सरकार के प्रतिष्ठित भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु में आयोजित होने वाले सेमीकंडक्टर STEM ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए हुआ है। यह उपलब्धि आदिवासी अंचल के विद्यार्थियों के लिए नई उम्मीद और प्रेरणा का संदेश लेकर आई है।
छठवीं से ही दिखने लगी थी चमक
विद्यालय के शिक्षकों के अनुसार, हेमकांता जब छठवीं कक्षा में ईएमआरएस छर्राटांगर में प्रवेश लिया, तभी से उसकी लगन, अनुशासन और सीखने की ललक स्पष्ट दिखाई देने लगी थी। नियमित अध्ययन, प्रश्न पूछने की जिज्ञासा और लक्ष्य के प्रति समर्पण ने उसे धीरे-धीरे उत्कृष्टता की ओर अग्रसर किया।
अपनी सफलता पर हेमकांता कहती हैं,
“यह उपलब्धि केवल मेरी नहीं है। मेरे शिक्षक, प्राचार्य और विद्यालय का वातावरण हमेशा मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता रहा। प्राचार्य सर ने व्यक्तिगत रूप से मार्गदर्शन दिया, जिससे आत्मविश्वास बढ़ा।”
प्राचार्य और शिक्षक टीम का समर्पण
विद्यालय के प्राचार्य श्री मनीराम जांगड़े ने इस अवसर को पूरे संस्थान के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि ईएमआरएस का उद्देश्य केवल परीक्षा परिणाम तक सीमित नहीं, बल्कि छात्रों को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धाओं के लिए तैयार करना है।
“हेमकांता की सफलता हमारे शिक्षकों की मेहनत और बच्चों की क्षमता का प्रमाण है,” उन्होंने कहा।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का सहयोग
प्राचार्य ने यह भी स्वीकार किया कि विद्यालय की प्रगति में जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने सांसद राधेश्याम राठिया, रायगढ़ कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी तथा सहायक आयुक्त (आदिवासी विकास) श्रीकांत दुबे के सतत मार्गदर्शन और सहयोग के लिए आभार जताया। उनके अनुसार, समय-समय पर अधिकारियों के दौरे और प्रोत्साहन से विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ता है।
भविष्य के वैज्ञानिकों की ओर एक कदम
हेमकांता का चयन जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) की उस विशेष पहल के तहत हुआ है, जिसका उद्देश्य आदिवासी प्रतिभाओं को विज्ञान और तकनीक के उच्च स्तर तक पहुंचाना है। इस कार्यक्रम के जरिए देश को भविष्य के वैज्ञानिक और शोधकर्ता मिल सकेंगे।
हेमकांता की इस सफलता से छर्राटांगर ही नहीं, आसपास के गांवों में भी खुशी और उत्साह का माहौल है। अभिभावकों और ग्रामीणों का कहना है कि यह उपलब्धि साबित करती है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो गांव की बेटियां भी देश के शीर्ष संस्थानों तक पहुंच सकती हैं।
छर्राटांगर की यह बेटी आज सिर्फ एक छात्रा नहीं, बल्कि पूरे अंचल की उम्मीद बन चुकी है—जो आने वाली पीढ़ियों को आगे बढ़ने का रास्ता दिखा रही है।
समाचार सहयोगी सिकंदर चौहान