गृह ग्राम में सजी साहित्य की उजली संध्या: भरत नायक ‘बाबूजी’ के सम्मान से दमका मंजिल ग्रुप का वार्षिक सम्मेलन

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
लोहरसिंह (रायगढ़)।
साहित्य केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि समाज की संवेदनाओं का जीवंत दस्तावेज होता है—इसी विचार को केंद्र में रखकर मंजिल ग्रुप ऑफ साहित्य मंच का वार्षिक सम्मेलन इस वर्ष असाधारण गरिमा और आत्मीयता के साथ आयोजित हुआ। कार्यक्रम की सबसे विशेष बात यह रही कि छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार, समीक्षक और भरत साहित्य मंडल के संस्थापक आदरणीय भरत नायक ‘बाबूजी’ को उनके ही गृह ग्राम में जाकर सम्मानित किया गया।
दिल्ली से स्वयं पहुँचे मंच के वरिष्ठ अधिकारी एवं सीईओ सुधीर सिंह सुधाकर ने नायक जी को सात विशिष्ट सम्मानों से अलंकृत किया। यह केवल एक सम्मान समारोह नहीं था, बल्कि उस पीढ़ी के प्रति कृतज्ञता का सार्वजनिक प्रदर्शन था जिसने क्षेत्रीय साहित्य को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक गरिमा के साथ हुआ। श्री रामकुमार पटेल (नंदेली) द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना और श्रीमती प्रधान द्वारा दीप प्रज्वलन ने आयोजन को आध्यात्मिक ऊष्मा प्रदान की। मंच पर उपस्थित अतिथियों की उपस्थिति स्वयं इस बात का प्रमाण थी कि साहित्यिक संवाद अब छोटे कस्बों और गांवों में भी व्यापक स्वर ग्रहण कर रहा है।
सम्मेलन के मुख्य अतिथि सुधीर सिंह सुधाकर रहे, जबकि अध्यक्षता छत्तीसगढ़ के प्रथम अंग्रेज़ी उपन्यासकार डॉ. वासुदेव यादव ने की। अति विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. मीन केतन प्रधान तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में निर्भय राम गुप्ता की उपस्थिति ने कार्यक्रम की बौद्धिक ऊँचाई को और विस्तार दिया। संचालन का दायित्व नेतराम राठिया ने संभाला, जिन्होंने कार्यक्रम को सहज और प्रवाहपूर्ण बनाए रखा।

भव्य साहित्यिक सत्र में देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कवियों ने काव्य पाठ प्रस्तुत किया। छायावादी परंपरा से लेकर समकालीन अभिव्यक्तियों तक, कविता और कहानी की विविध धाराओं ने श्रोताओं को लंबे समय तक बांधे रखा। वरिष्ठ रचनाकारों ने साहित्य की वर्तमान दिशा, डिजिटल युग में लेखन की चुनौतियों और युवा पीढ़ी की भूमिका पर गंभीर विचार रखे।
संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सम्मान एवं कवि सम्मेलन में डॉ. मीन केतन प्रधान, रामकुमार पटेल ‘शांत’, श्रीकांत चैनी, सुधीर सिंह सुधाकर, भरत नायक ‘बाबूजी’, निर्भय राम गुप्ता, डॉ. वासुदेव यादव, सूर्य कुमार पंडा, आनंद त्रिवेदी ‘आनंद’, गुलाब कंवर ‘गुलाब’, जयंत कुमार कल्चुरी, नेतराम राठिया, अनुपम कुमार, संतोष सिदार, संग्राम सिंह राठिया, रंगमोहन साहू, सत्यानंद गुप्ता और रामेश्वर नायक सहित अनेक साहित्यकारों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम की उल्लेखनीय विशेषता यह रही कि नवोदित रचनाकारों को भी मंच दिया गया। युवा कवियों और कहानीकारों की प्रस्तुतियों ने यह संकेत दिया कि क्षेत्रीय साहित्य की नई पीढ़ी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही है। वरिष्ठ साहित्यकारों ने उन्हें मार्गदर्शन देते हुए निरंतर लेखन और सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहने की सलाह दी।
सम्मेलन के दौरान उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान के लिए कई रचनाकारों को सम्मानित किया गया। अध्यक्षीय संबोधन में साहित्य को समाज का दर्पण बताते हुए उसके नैतिक दायित्वों—संवेदना, संवाद और सामाजिक चेतना—पर विशेष बल दिया गया।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ यह संकल्प दोहराया गया कि आने वाले वर्षों में मंच और अधिक रचनात्मक गतिविधियाँ आयोजित करेगा, ताकि साहित्य केवल पुस्तकों तक सीमित न रहे, बल्कि जन-जन की आवाज बनकर समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बने।
इस तरह, एक छोटे से ग्राम में आयोजित यह सम्मेलन यह संदेश दे गया कि साहित्य की असली ताकत उसकी पहुंच और संवेदना में निहित है—और जब शब्द गांव की चौपाल तक पहुँचते हैं, तभी वे सच में समाज का इतिहास लिखते हैं।