गुजरात की टोरेंट पावर ने वीसा पावर की 730 एकड़ जमीन पर लगाई 400 करोड़ की बोली: दिवालिया कंपनी का लिक्विडेशन पूरा

सम्पादक जर्नलिस्ट अमरदीप चौहान/अमरखबर.कॉम रायगढ़, 3 सितंबर 2025: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एक नया अध्याय लिखा गया है। गुजरात की प्रमुख बिजली कंपनी टोरेंट पावर ने दिवालिया हो चुकी वीसा पावर लिमिटेड की करीब 730 एकड़ जमीन पर 400 करोड़ रुपये की सर्वोच्च बोली लगाई है। यह नीलामी 20 अगस्त को निर्धारित थी, और हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टोरेंट पावर ही विजेता रही है, हालांकि दोनों पक्षों ने अभी इसे आधिकारिक रूप से कन्फर्म नहीं किया है।
यह खबर वीसा पावर के लंबे संघर्ष का अंतिम चरण दर्शाती है। कंपनी, जो कभी 1200 मेगावाट के महत्वाकांक्षी पावर प्लांट प्रोजेक्ट के सपनों पर उड़ान भर रही थी, अब अपनी संपत्तियों को बेचकर कर्ज चुकाने की प्रक्रिया में है। डूमरपाली और देवरी क्षेत्रों में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट 2014 में बंद हो गया था, और उसके बाद कंपनी दिवालिया घोषित हो गई। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की कोलकाता बेंच ने लिक्विडेशन का आदेश दिया, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मशीनरी को छोड़कर जमीन की नीलामी की इजाजत दी।

वीसा पावर की कहानी: सपनों से दिवालिया तक का सफर
कहानी शुरू होती है 2005 से, जब वीसा पावर लिमिटेड ने छत्तीसगढ़ सरकार के साथ एमओयू साइन किया। कंपनी का प्लान था रायगढ़ जिले के देवरी और डूमरपाली में 1200 मेगावाट का थर्मल पावर प्लांट लगाना। बैंकों से भारी-भरकम लोन लेकर काम शुरू हुआ। भेल (BHEL) और एल एंड टी (L&T) जैसी दिग्गज कंपनियों को टेंडर दिए गए। लेकिन जल्द ही मुश्किलें शुरू हो गईं। कंपनी कर्ज चुकाने में नाकाम रही, और 2014 तक प्रोजेक्ट ठप हो गया।
इसके बाद केंद्र सरकार के इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के सख्त नियमों ने कंपनी को दिवालिया घोषित कर दिया। बैंकों की अपील पर एनसीएलटी में रिजॉल्यूशन प्रोसेस चली, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई, जहां जमीन की नीलामी को हरी झंडी मिली, लेकिन मशीनरी को सुरक्षित रखा गया। नीलामी में शामिल संपत्तियां थीं:
– देवरी और डूमरपाली की 587.51 एकड़ निजी जमीन और 99.02 एकड़ उद्योग विभाग से लीज पर ली गई जमीन (रिजर्व प्राइस: 170 करोड़ रुपये)।
– डोंगीतराई, किरीतमाल, पंडरीपानी, कोड़तराई, चारभाटा, लेबड़ा, डोंगाढ़केल, काशीचुआं और साराडीह की 39.85 एकड़ जमीन (रिजर्व प्राइस: 1.95 करोड़ रुपये)।
– अन्य संपत्तियों की वैल्यू: 71.60 करोड़ रुपये।
कुल मिलाकर, नीलामी में लगभग 400 करोड़ रुपये की बोली लगी, जो क्रेडिटर्स के लिए राहत की सांस है।
4000 करोड़ का कर्ज और धोखाधड़ी के आरोप
वीसा पावर पर फाइनेंशियल और ऑपरेशनल क्रेडिटर्स का कुल कर्ज करीब 4000 करोड़ रुपये था, जिसमें से एनसीएलटी ने मात्र 3000 करोड़ का क्लेम मंजूर किया। लेकिन असली झटका तो सीबीआई की जांच से लगा। अगस्त 2023 में एजेंसी ने कंपनी के चेयरमैन विशंभर शरण, एमडी विकास अग्रवाल और ज्वाइंट एमडी सुब्रतो द्विवेदी के खिलाफ 1964 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का केस दर्ज किया। आरोप था कि पब्लिक सेक्टर बैंकों से लिए गए लोन को डायवर्ट कर दिया गया—दूसरी कंपनियों के शेयर और इक्विटी में निवेश कर दिया।
भेल को 2665 करोड़ का ऑर्डर मिला था, लेकिन मशीनरी का भुगतान नहीं हुआ। दिवालिया होने के बाद कबाड़ी मशीनरी को काटकर स्थानीय स्टील प्लांटों में बेच ले गए। करोड़ों का नुकसान हुआ, और पुलिस की कोई कार्रवाई नहीं हुई। 11 बैंकों का पैसा फंस गया, और अब लिक्विडेशन से कुछ राहत मिल रही है।
टोरेंट पावर का कदम: नई शुरुआत की उम्मीद?!
गुजरात की टोरेंट पावर, जो पहले से ही रिन्यूएबल एनर्जी और थर्मल पावर में मजबूत है, ने इस जमीन पर बोली लगाकर सबका ध्यान खींचा है। कंपनी हाल ही में मध्य प्रदेश में 1600 मेगावाट के अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल प्लांट के लिए 22,000 करोड़ के निवेश की घोषणा कर चुकी है। यह खरीद वीसा पावर की जमीन पर नया पावर प्रोजेक्ट शुरू करने का संकेत दे सकती है, जो छत्तीसगढ़ की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करेगी।
हालांकि, दोनों कंपनियों ने अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन इंडस्ट्री सर्कल में यह खबर तेजी से फैल रही है। क्रेडिटर्स को उम्मीद है कि इससे उनका कुछ कर्ज वसूल हो जाएगा, और क्षेत्र में नई निवेश की लहर चलेगी। वीसा पावर का यह अंत एक सबक है—कर्ज के जाल में फंसी कंपनियों के लिए IBC कितना सख्त हो सकता है। अब सवाल यह है कि टोरेंट पावर इस जमीन का क्या करेगी? क्या यह छत्तीसगढ़ में एक नया ऊर्जा हब बनेगा? आने वाले दिनों में और अपडेट्स का इंतजार।