गारे–पेलमा सेक्टर जनसुनवाई विवाद: 14 गांवों ने दी अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकेबंदी की चेतावनी

फ्रीलांस एडिटर अमरदीप चौहान/अमरखबर.कॉम रायगढ़/घरघोड़ा।
गारे–पेलमा सेक्टर-1 की पर्यावरणीय जनसुनवाई को लेकर विस्थापित गांवों में गहरा असंतोष उभर आया है। जनसुनवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए प्रभावित 14 गांवों के ग्रामीणों ने 12 दिसंबर 2025 से अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकेबंदी (व्यावसायिक वाहनों का चक्का जाम) की घोषणा की है और इसकी लिखित सूचना अविचागीय अधिकारी, घरघोड़ा को सौंप दी है।
ग्रामीणों का आरोप—“जनसुनवाई नहीं, छलसुनवाई हुई”
ग्रामीणों का कहना है कि 8 दिसंबर को हाई स्कूल मैदान में प्रस्तावित जनसुनवाई के स्थान को अचानक बदला गया। आरोप है कि जनसुनवाई को “छद्म रूप” से अन्यत्र आयोजित किया गया, जहाँ कंपनी कर्मचारियों, ठेकेदारों और चुनिंदा समर्थकों को ही अपनी बात रखने का मौका दिया गया।
पीड़ित ग्रामवासियों के अनुसार,
✔ आम जनता को पुलिस ने रोका
✔ प्रभावित परिवार स्थल तक पहुँच ही नहीं सके
✔ आधिकारिक मंच पर केवल पूर्व-चयनित व्यक्तियों के वक्तव्य सुने गए
ग्रामीणों का कहना है कि यह घटना जनसुनवाई की बुनियादी भावना—जन सहभागिता—का सीधा उल्लंघन है।

14 गांवों ने किया संयुक्त निर्णय
जनसुनवाई को “अवैध व एकतरफा” बताते हुए प्रभावित 14 गांवों की आमसभा ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया है कि:
12 दिसंबर 2025 से अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकेबंदी की जाएगी
यानी क्षेत्र में व्यावसायिक वाहनों का पूर्ण चक्का जाम रहेगा।
ग्रामीणों ने यह भी स्पष्ट कहा है कि जनसुनवाई को निरस्त किए जाने तक आंदोलन जारी रहेगा।

“हानि की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की”
प्रेषित सूचना में ग्रामवासियों ने चेतावनी दी है कि नाकेबंदी के दौरान यदि किसी भी प्रकार की जन-धन की हानि होती है, तो इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी, क्योंकि उन्होंने ही जनसुनवाई जैसी संवेदनशील प्रक्रिया को विवादित बनाया है।
सूचना में यह भी उल्लेख है कि ग्रामीणों ने कई बार शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी, मगर उनकी आवाज न तो मंच तक पहुँची और न ही रिकॉर्ड में शामिल की गई।
प्रशासन मौन—ग्रामीणों में असंतोष
जनसुनवाई के तुरंत बाद से ग्रामीणों का विरोध जारी है।
छ.ग. राज्य में कोयला परियोजनाओं से प्रभावित क्षेत्रों में जनसुनवाई को लेकर पहले भी विवाद उठते रहे हैं, लेकिन इस बार ग्रामीणों ने अत्यंत संगठित रूप में लिखित चेतावनी दी है।
प्रशासन नाकेबंदी को लेकर क्या रुख अपनाता है, यह देखना अब महत्वपूर्ण होगा।
वहीं क्षेत्र में रहने वाले लोग और स्थानीय व्यापारी इस संभावित बंदी से चिंतित भी हैं।
समाचार सहयोगी अशोक राजशिखर