गारे की मकरसंक्रांति : आस्था, एकता और लोकसंस्कृति का जीवंत संगम

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़ जिले के तमनार तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत गारें में आज 14 जनवरी 2026 को मकरसंक्रांति का पर्व पूरे श्रद्धा, उल्लास और सामाजिक सौहार्द के साथ मनाया गया। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं रहा, बल्कि ग्रामीण जीवन की सामूहिक चेतना, परंपरा और आपसी एकजुटता का सजीव प्रमाण बनकर उभरा।
प्रातःकाल से ही क्षेत्र में उत्सव का वातावरण बन गया था। आसपास के 30 से 40 गांवों से ग्रामीण—महिलाएं, पुरुष, युवा, बुजुर्ग, जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता—गारें पहुंचे। पूजा स्थल पर सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना की गई, जहां सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित कर नए कृषि चक्र, नई आशाओं और नवजीवन के लिए प्रार्थना की गई। वैदिक मंत्रोच्चार और लोक परंपराओं के साथ हुए इस अनुष्ठान में आस्था के साथ-साथ सामूहिक सहभागिता की झलक साफ दिखाई दी।
मकरसंक्रांति को नववर्ष के रूप में मानने की परंपरा के अनुरूप उपस्थित जनसमूह ने एक-दूसरे को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। बातचीत में गांव-समाज की समस्याओं, आपसी सहयोग और भविष्य की योजनाओं पर भी चर्चा हुई। युवाओं की सक्रिय भागीदारी ने यह संदेश दिया कि परंपरा और आधुनिक सोच का यह मेल आने वाले समय में समाज को नई दिशा देगा।

कार्यक्रम के दौरान सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीण संस्कृति की मजबूती पर जोर देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन केवल पर्व मनाने का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, सद्भाव और सामूहिक जिम्मेदारी को मजबूत करने का अवसर होते हैं। महिलाओं की सहभागिता ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की, वहीं बुजुर्गों की उपस्थिति ने इसे अनुभव और संस्कारों से जोड़ दिया।

समापन अवसर पर ईश्वर से सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की कामना की गई। गारें में मनाई गई यह मकरसंक्रांति यह बताने के लिए काफी थी कि जब गांव एकजुट होते हैं, तो परंपरा केवल निभाई नहीं जाती, बल्कि वह समाज की आत्मा बन जाती है।